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Kangra News: दाड़ी मैदान के टेंडर का विरोध, कारोबारी बोले- ऐतिहासिक मेला बना दिया ट्रेड फेयर
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:44 AM IST
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धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के दाड़ी मैदान में ऐतिहासिक धुम्मू शाह मेला अब अपने मूल स्वरूप से भटककर एक ट्रेड फेयर में सिमटता जा रहा है। यह आरोप स्थानीय कारोबारियों ने लगाए हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा इस बार मेले के मैदान का टेंडर 1.70 करोड़ रुपये में किया गया है। इस बार मंदिर मैदान का भी टेंडर कर दिया गया है, जिसका दाड़ी व्यापार मंडल और स्थानीय कारोबारियों ने विरोध किया है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष हर्ष ओबरॉय का कहना है कि धुम्मू शाह मेला एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन रहा है, जिसे पहले दाड़ी मेला कमेटी द्वारा संचालित किया जाता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रशासन खुद ही मेला आयोजित कर रहा है, जिससे इसकी पारंपरिक पहचान प्रभावित हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल राजस्व एकत्रित करना रह गया है। ऊंची टेंडर राशि के कारण अब केवल बड़े पूंजीपति या बाहरी राज्य के व्यापारी ही मेले में भाग ले पाएंगे, जबकि छोटे स्थानीय कारोबारी इससे बाहर हो जाएंगे। उनका कहना है कि यदि पुरानी मेला कमेटी में कोई समस्या थी तो प्रशासन को उसके चुनाव दोबारा करवाने चाहिए थे।
दाड़ी व्यापार मंडल के महासचिव महिंद्र सिंह ने भी इसी तरह की चिंता जताते हुए कहा कि पहले मेले से होने वाली आय मंदिर के विकास कार्यों में लगाई जाती थी लेकिन अब नगर निगम ने मंदिर मैदान को अपने अधीन ले लिया है और वर्षों से मेले का आयोजन प्रशासन द्वारा किए जाने के बावजूद मैदान की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
वहीं, उपप्रधान अशोक वर्मा और कारोबारी सुनील महाजन ने कहा कि मेले का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। पहले यह मेला लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन था लेकिन अब प्रशासन द्वारा एकत्रित की जा रही राशि का उपयोग किसी विकास कार्य में नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों ने मांग की है कि मेले को उसके पारंपरिक स्वरूप में बहाल किया जाए और छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष हर्ष ओबरॉय का कहना है कि धुम्मू शाह मेला एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन रहा है, जिसे पहले दाड़ी मेला कमेटी द्वारा संचालित किया जाता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रशासन खुद ही मेला आयोजित कर रहा है, जिससे इसकी पारंपरिक पहचान प्रभावित हुई है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि अब प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल राजस्व एकत्रित करना रह गया है। ऊंची टेंडर राशि के कारण अब केवल बड़े पूंजीपति या बाहरी राज्य के व्यापारी ही मेले में भाग ले पाएंगे, जबकि छोटे स्थानीय कारोबारी इससे बाहर हो जाएंगे। उनका कहना है कि यदि पुरानी मेला कमेटी में कोई समस्या थी तो प्रशासन को उसके चुनाव दोबारा करवाने चाहिए थे।
दाड़ी व्यापार मंडल के महासचिव महिंद्र सिंह ने भी इसी तरह की चिंता जताते हुए कहा कि पहले मेले से होने वाली आय मंदिर के विकास कार्यों में लगाई जाती थी लेकिन अब नगर निगम ने मंदिर मैदान को अपने अधीन ले लिया है और वर्षों से मेले का आयोजन प्रशासन द्वारा किए जाने के बावजूद मैदान की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
वहीं, उपप्रधान अशोक वर्मा और कारोबारी सुनील महाजन ने कहा कि मेले का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। पहले यह मेला लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन था लेकिन अब प्रशासन द्वारा एकत्रित की जा रही राशि का उपयोग किसी विकास कार्य में नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों ने मांग की है कि मेले को उसके पारंपरिक स्वरूप में बहाल किया जाए और छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।