{"_id":"6a578b7fee9abfa9ab0e3ffb","slug":"immediately-replace-damaged-paddy-plants-after-transplanting-kangra-news-c-95-1-kng1045-245017-2026-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: रोपाई के बाद खराब हुए पौधों की जगह तुरंत लगाएं नए धान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: रोपाई के बाद खराब हुए पौधों की जगह तुरंत लगाएं नए धान
Thu, 16 Jul 2026 07:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 16 Jul 2026 07:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पालमपुर (कांगड़ा)। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मौसम के अनुकूल होने वाले कृषि कार्यों को लेकर कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है। विवि के प्रसार निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि जिन किसानों ने धान की रोपाई जुलाई के प्रथम सप्ताह में की है, वे रोपाई के बाद खराब हो चुके पौधों की जगह तुरंत नए पौधों की रोपाई (गैप फिलिंग) कर दें।
इसके अलावा धान की फसल को खरपतवारों से बचाने के लिए समय पर रसायनों का उचित मात्रा में छिड़काव करना सुनिश्चित करें, ताकि फसल की पैदावार प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के चार दिन बाद सेफनर युक्त दवा का प्रयोग करें। सात दिन बाद सेफनर के बिना प्रीटिलाक्लोर का इस्तेमाल करें। रोपाई के 4-5 दिनों के भीतर व्यूटाक्लोर-मैचटी को रेत में मिलाकर खड़े पानी में डालें। रोपाई के 25 से 30 दिन बाद के खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण के लिए बाइस्पाईरीबैक 10 ईसी का छिड़काव करें।
मक्की, दलहन और सोयाबीन का ऐसे करें प्रबंधन
प्रसार निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि 30 से 35 दिन की मक्की की फसल में निराई-गुड़ाई के साथ यूरिया खाद डालें। बिजाई के 20 दिन बाद सभी खरपतवारों के नियंत्रण के लिए टेम्बोट्रियोन का सर्फेक्टेंट के साथ छिड़काव करें। निचले और मध्यवर्ती क्षेत्रों के दलहन (माश, मूंग, कुल्थी) की खेती करने वाले किसान खेतों से जल निकास की उचित व्यवस्था रखें और निराई-गुड़ाई करें। सोयाबीन की बिजाई के 25-30 दिन बाद जब खरपतवारों की 2-3 पत्तियां निकल आएं तो क्यूजेलोफाप ईथाइल 60 ग्राम के साथ क्लोरी मुयरोन ईथाइल का घोल बनाकर छिड़कें।
विज्ञापन
तिलहनी फसलें और मटर की फसल की करें बिजाई
डॉ. विनोद ने कहा कि किसान सूरजमुखी (ईसी-68415) और तिल (तिल नं.-1/ब्रजेश्वरी) की बिजाई करें। बिजाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक कैप्टान से उपचारित करना न भूलें। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों के किसान मटर की उन्नत किस्मों (पालम समूल, पंजाब 89, लिंकन, आजाद मटर 1, पालम प्रिया) की बिजाई करें। बिजाई के तुरंत बाद खरपतवार नाशक लासो-एलाक्लोर या स्टाम्प-पैंडिमिथेलिन का छिड़काव करें।
सब्जियों में कीट और रोग नियंत्रण के उपाय
प्रसार निदेशक ने कहा कि मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में अगेती फूलगोभी (पालम उपहार, इंप्रूव्ड जैपनीज, पूसा दीपाली, मेघा व बरखा) की 45 सेमी की दूरी पर शाम के समय मेड़ों पर रोपाई करें। टमाटर, बैंगन और मिर्च की निराई-गुड़ाई करते समय पौधों की जड़ों के पास नाइट्रोजन दें। बैंगन व टमाटर में फल सड़न रोकने के लिए रिडोमिल एम जैड या मेटको (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) का छिड़काव करें। बैंगन, टमाटर और भिंडी में फल छेदक सुंडी के लिए कार्बरिल 50 डब्ल्यूपी या फैनबलरेट छिड़कें। भिंडी में ब्लिस्टर बीटल और करेले में हड्डा बीटल के लिए सेविन 50 डब्ल्यूपी का प्रयोग करें। फल मक्खी नियंत्रण के लिए प्रभावित फल नष्ट करें, प्रति कनाल एक फेरोमोन ट्रैप लगाएं और मैलाथियॉन व गुड़ के मिश्रण का छिड़काव करें।
विज्ञापन
इसके अलावा धान की फसल को खरपतवारों से बचाने के लिए समय पर रसायनों का उचित मात्रा में छिड़काव करना सुनिश्चित करें, ताकि फसल की पैदावार प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के चार दिन बाद सेफनर युक्त दवा का प्रयोग करें। सात दिन बाद सेफनर के बिना प्रीटिलाक्लोर का इस्तेमाल करें। रोपाई के 4-5 दिनों के भीतर व्यूटाक्लोर-मैचटी को रेत में मिलाकर खड़े पानी में डालें। रोपाई के 25 से 30 दिन बाद के खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण के लिए बाइस्पाईरीबैक 10 ईसी का छिड़काव करें।
विज्ञापन
मक्की, दलहन और सोयाबीन का ऐसे करें प्रबंधन
प्रसार निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि 30 से 35 दिन की मक्की की फसल में निराई-गुड़ाई के साथ यूरिया खाद डालें। बिजाई के 20 दिन बाद सभी खरपतवारों के नियंत्रण के लिए टेम्बोट्रियोन का सर्फेक्टेंट के साथ छिड़काव करें। निचले और मध्यवर्ती क्षेत्रों के दलहन (माश, मूंग, कुल्थी) की खेती करने वाले किसान खेतों से जल निकास की उचित व्यवस्था रखें और निराई-गुड़ाई करें। सोयाबीन की बिजाई के 25-30 दिन बाद जब खरपतवारों की 2-3 पत्तियां निकल आएं तो क्यूजेलोफाप ईथाइल 60 ग्राम के साथ क्लोरी मुयरोन ईथाइल का घोल बनाकर छिड़कें।
विज्ञापन
तिलहनी फसलें और मटर की फसल की करें बिजाई
डॉ. विनोद ने कहा कि किसान सूरजमुखी (ईसी-68415) और तिल (तिल नं.-1/ब्रजेश्वरी) की बिजाई करें। बिजाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक कैप्टान से उपचारित करना न भूलें। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों के किसान मटर की उन्नत किस्मों (पालम समूल, पंजाब 89, लिंकन, आजाद मटर 1, पालम प्रिया) की बिजाई करें। बिजाई के तुरंत बाद खरपतवार नाशक लासो-एलाक्लोर या स्टाम्प-पैंडिमिथेलिन का छिड़काव करें।
सब्जियों में कीट और रोग नियंत्रण के उपाय
प्रसार निदेशक ने कहा कि मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में अगेती फूलगोभी (पालम उपहार, इंप्रूव्ड जैपनीज, पूसा दीपाली, मेघा व बरखा) की 45 सेमी की दूरी पर शाम के समय मेड़ों पर रोपाई करें। टमाटर, बैंगन और मिर्च की निराई-गुड़ाई करते समय पौधों की जड़ों के पास नाइट्रोजन दें। बैंगन व टमाटर में फल सड़न रोकने के लिए रिडोमिल एम जैड या मेटको (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) का छिड़काव करें। बैंगन, टमाटर और भिंडी में फल छेदक सुंडी के लिए कार्बरिल 50 डब्ल्यूपी या फैनबलरेट छिड़कें। भिंडी में ब्लिस्टर बीटल और करेले में हड्डा बीटल के लिए सेविन 50 डब्ल्यूपी का प्रयोग करें। फल मक्खी नियंत्रण के लिए प्रभावित फल नष्ट करें, प्रति कनाल एक फेरोमोन ट्रैप लगाएं और मैलाथियॉन व गुड़ के मिश्रण का छिड़काव करें।