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Kangra News: पहले खारिज किया बीमा दावा, अब कंपनी को ब्याज के साथ देने होंगे उपचार के पैसे
Wed, 29 Jul 2026 05:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 29 Jul 2026 05:57 AM IST
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धर्मशाला। शराब सेवन का आधार बनाकर उपभोक्ता का बीमा दावा खारिज करना कंपनी को महंगा पड़ा है। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने एचडीएफसी एर्गो बीमा कंपनी को 96,710 रुपये की इलाज राशि नौ फीसदी ब्याज सहित उपभोक्ता को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही कंपनी को 15 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये वाद खर्च भी उपभोक्ता को देना होगा।
मामले के अनुसार पालमपुर में किराये पर रह रहे नूरपुर निवासी अंशुल कोरला ने एचडीएफसी एर्गो से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। एक अप्रैल 2025 को ब्रेन हेमरेज होने पर उन्हें पहले नागरिक अस्पताल नूरपुर और फिर मेडिकल कॉलेज टांडा में भर्ती कराया गया। इलाज और फिजियोथेरेपी पर कुल 96,710 रुपये खर्च हुए। जब उन्होंने क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर दावा खारिज कर दिया कि उन्होंने पॉलिसी लेते समय शराब सेवन की जानकारी छिपाई थी।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शराब सेवन की जानकारी देना केवल तभी अनिवार्य था जब बीमाधारक ने क्रिटिकल इलनेस ऐड-ऑन कवर लिया हो, जबकि शिकायतकर्ता ने ऐसा कोई कवर नहीं लिया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में शराब के उल्लेख मात्र से यह साबित नहीं होता कि बीमारी सीधे शराब के कारण ही हुई थी। बीमा कंपनी इस संबंध में कोई ठोस चिकित्सीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिसके बाद आयोग ने उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया।
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मामले के अनुसार पालमपुर में किराये पर रह रहे नूरपुर निवासी अंशुल कोरला ने एचडीएफसी एर्गो से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। एक अप्रैल 2025 को ब्रेन हेमरेज होने पर उन्हें पहले नागरिक अस्पताल नूरपुर और फिर मेडिकल कॉलेज टांडा में भर्ती कराया गया। इलाज और फिजियोथेरेपी पर कुल 96,710 रुपये खर्च हुए। जब उन्होंने क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर दावा खारिज कर दिया कि उन्होंने पॉलिसी लेते समय शराब सेवन की जानकारी छिपाई थी।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शराब सेवन की जानकारी देना केवल तभी अनिवार्य था जब बीमाधारक ने क्रिटिकल इलनेस ऐड-ऑन कवर लिया हो, जबकि शिकायतकर्ता ने ऐसा कोई कवर नहीं लिया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में शराब के उल्लेख मात्र से यह साबित नहीं होता कि बीमारी सीधे शराब के कारण ही हुई थी। बीमा कंपनी इस संबंध में कोई ठोस चिकित्सीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिसके बाद आयोग ने उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया।
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