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Kangra News: ख्वाजापीर के बेड़े को फूलों से सजा किया विसर्जन
Fri, 17 Jul 2026 02:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:50 AM IST
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जवाली में ख्वाजापीर का विसर्जन करते हुए लोग। स्रोत: जागरूक पाठक
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कोटला (कांगड़ा)। सावन संक्रांति के अवसर पर कोटला में मैहरा समुदाय ने लोक आस्था और परंपरा का प्रतीक ख्वाजापीर उत्सव मनाया। इस दौरान ख्वाजापीर के बेड़े को फूलों, गुब्बारों और रंग-बिरंगी सजावट से आकर्षक रूप दिया गया।
बेड़े में ख्वाजापीर की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ बेड़े को शोभायात्रा के रूप में देहर खड्ड के किनारे स्थित ख्वाजापीर मंदिर तक पहुंचाया, जहां परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन किया गया।
मान्यता है कि बरसात के मौसम में जब नदी-नाले उफान पर होते हैं, तब मछली पर सवार ख्वाजापीर देवता अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें हर अनहोनी से सुरक्षित रखते हैं। बेड़ा विसर्जन के उपरांत सामुदायिक भवन कोटला में श्रद्धालुओं को दलिया का प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान मैहरा बिरादरी के सदस्य योगराज मैहरा, राजेंद्र कुमार, राजकुमार, मोणा, गणेश, विंटा, रतन, लक्कू, गोका, चमनलाल और सुदर्शन सहित अन्य उपस्थित रहे। संवाद
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बेड़े में ख्वाजापीर की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ बेड़े को शोभायात्रा के रूप में देहर खड्ड के किनारे स्थित ख्वाजापीर मंदिर तक पहुंचाया, जहां परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन किया गया।
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मान्यता है कि बरसात के मौसम में जब नदी-नाले उफान पर होते हैं, तब मछली पर सवार ख्वाजापीर देवता अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें हर अनहोनी से सुरक्षित रखते हैं। बेड़ा विसर्जन के उपरांत सामुदायिक भवन कोटला में श्रद्धालुओं को दलिया का प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान मैहरा बिरादरी के सदस्य योगराज मैहरा, राजेंद्र कुमार, राजकुमार, मोणा, गणेश, विंटा, रतन, लक्कू, गोका, चमनलाल और सुदर्शन सहित अन्य उपस्थित रहे। संवाद
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