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Kangra News: आई मोबाइल यूनिट पर तीन साल से लॉकडाउन
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धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण आंखों का इलाज कराने आ रहे मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। अस्पताल परिसर में स्थित आई मोबाइल यूनिट पिछले करीब तीन वर्षों से स्टाफ की कमी के कारण पूरी तरह बंद पड़ी है और इसकी बिल्डिंग खाली है।
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अस्पताल में वर्तमान में कोई भी ऑप्थेल्मिक ऑफिसर (नेत्र जांच अधिकारी) मौजूद नहीं है, जिससे मरीजों की आंखों की बुनियादी जांच और चश्मे का नंबर तक नहीं जाँचा जा रहा है। मजबूरन लोगों को निजी केंद्रों पर पैसे खर्च कर चश्मे का नंबर चेक करवाना पड़ रहा है।
अस्पताल में ऑप्थेल्मिक ऑफिसर न होने का सीधा असर आंखों के ऑपरेशनों पर भी पड़ रहा है। करीब तीन साल पहले सरकार द्वारा आई मोबाइल यूनिट के स्टाफ का तबादला कर दिया गया था, जिसके बाद वहां तैनात ऑप्थेल्मिक ऑफिसर को अस्थाई रूप से अस्पताल की ओपीडी में शिफ्ट किया गया था। मगर, इसी साल जनवरी माह में उनका भी तबादला हो जाने के बाद से यह पद पूरी तरह रिक्त चल रहा है।
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धर्मशाला अस्पताल की नेत्र जांच ओपीडी में रोजाना करीब 100 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में वर्तमान में मात्र एक नेत्र जांच विशेषज्ञ तैनात हैं, जिनके लिए ओपीडी संभालना और मरीजों की जांच करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की कतारें लग रही हैं और बुजुर्ग व गंभीर मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकार और उच्च अधिकारियों को इस रिक्त पद और स्टाफ की कमी की समस्या से कई बार लिखित में अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक यहां किसी भी ऑप्थेल्मिक ऑफिसर की नियुक्ति नहीं की गई है।
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हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अस्पताल में वर्तमान में कोई भी ऑप्थेल्मिक ऑफिसर (नेत्र जांच अधिकारी) मौजूद नहीं है, जिससे मरीजों की आंखों की बुनियादी जांच और चश्मे का नंबर तक नहीं जाँचा जा रहा है। मजबूरन लोगों को निजी केंद्रों पर पैसे खर्च कर चश्मे का नंबर चेक करवाना पड़ रहा है।
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अस्पताल में ऑप्थेल्मिक ऑफिसर न होने का सीधा असर आंखों के ऑपरेशनों पर भी पड़ रहा है। करीब तीन साल पहले सरकार द्वारा आई मोबाइल यूनिट के स्टाफ का तबादला कर दिया गया था, जिसके बाद वहां तैनात ऑप्थेल्मिक ऑफिसर को अस्थाई रूप से अस्पताल की ओपीडी में शिफ्ट किया गया था। मगर, इसी साल जनवरी माह में उनका भी तबादला हो जाने के बाद से यह पद पूरी तरह रिक्त चल रहा है।
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धर्मशाला अस्पताल की नेत्र जांच ओपीडी में रोजाना करीब 100 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में वर्तमान में मात्र एक नेत्र जांच विशेषज्ञ तैनात हैं, जिनके लिए ओपीडी संभालना और मरीजों की जांच करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की कतारें लग रही हैं और बुजुर्ग व गंभीर मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकार और उच्च अधिकारियों को इस रिक्त पद और स्टाफ की कमी की समस्या से कई बार लिखित में अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक यहां किसी भी ऑप्थेल्मिक ऑफिसर की नियुक्ति नहीं की गई है।