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Kangra News: ट्रायल कोर्ट में दोषी करार को नहीं मिली राहत, अपील खारिज

Sun, 19 Jul 2026 05:48 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2026 05:48 AM IST
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No relief against trial court conviction; appeal dismissed.
चेक बाउंस के मामले में दो साल कारावास, 3.40 लाख का करना होगा भुगतान
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ओटीएस में तीन लाख जमा करने का किया था दावा, अदालत में साबित नहीं कर सका
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा सपना पांडेय की अदालत ने हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक रक्कड़ के चेक बाउंस के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देहरा के 12 मार्च 2026 को सुनाए गए दोष सिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।

मामले के अनुसार बैंक ने वर्ष 2021 में एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दायर की थी। बैंक का आरोप था कि रक्कड़ तहसील के व्यक्ति ने ऋण खाते की देनदारी चुकाने के लिए 1.70 लाख रुपये का चेक जारी किया था लेकिन 10 दिसंबर 2020 को खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया।
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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास, 3.40 लाख रुपये मुआवजा अदा करने और मुआवजा न देने पर तीन माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र अदालत में अपील दायर की। अपील में आरोपी ने दलील दी कि उसने बैंक की वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना के तहत तीन लाख रुपये जमा कर दिए थे और बैंक अधिकारियों ने दोनों ऋण खाते बंद करने का आश्वासन दिया था इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं है।
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सत्र अदालत ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपी ने ऋण लेने और चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है। अदालत ने पाया कि ओटीएस के तहत जमा राशि के बावजूद ऋण की पूरी देनदारी समाप्त नहीं हुई थी और आरोपी के अपने गवाह ने भी अदालत में स्वीकार किया कि दोनों ऋण खातों में अभी भी दो-दो लाख रुपये से अधिक की देनदारी शेष थी। सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराया। अदालत ने आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतने के निर्देश दिए हैं।
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