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Kangra News: अब शरीर का तापमान और हार्ट बीट बताएंगे मन का हाल
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 02 Feb 2026 07:41 AM IST
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कन्या स्कूल पालमपुर की छात्राएं प्रधानाचार्य रितु जम्वाल, उपनिदेशक कमलेश ठाकुर और मेंटरों के सा
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पालमपुर (कांगड़ा)। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पालमपुर की छात्राओं ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में मिसाल पेश की है। स्कूल की 12वीं कक्षा की निधि और 11वीं की छात्रा शैलजा ने मिलकर मूड स्विंग डिटेक्टर सिस्टम नामक एक वर्किंग मॉडल तैयार किया है। यह सिस्टम शरीर के तापमान और हृदय की गति (हार्ट बीट) के आधार पर यह बताने में सक्षम है कि व्यक्ति खुशी, चिंता या तनाव की किस स्थिति में है।
छात्राओं ने इस मॉडल को स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में विकसित किया है। निधि को इस मॉडल की प्रेरणा अपनी दादी के स्वभाव में आने वाले अचानक बदलावों को देखकर मिली। वर्तमान में यह मॉडल प्रोटोटाइप स्तर पर है, लेकिन छात्राओं का लक्ष्य इसे भविष्य में एक अंगूठी (रिंग) या रिस्ट बैंड जैसा छोटा और पहनने योग्य डिवाइस बनाना है।
छात्रा निधि का कहना है कि आज के दौर में युवा अक्सर मानसिक तनाव से गुजरते हैं और अपनी बात साझा नहीं कर पाते। यह तकनीक उनके भावनात्मक संकेतों को समय रहते पकड़ लेगी। इससे न केवल उन्हें सही समय पर मदद मिल सकेगी, बल्कि गंभीर स्थितियों में जान बचाना भी संभव होगा।
इस प्रोजेक्ट में मेंटर सन्नी, भौतिकी की शिक्षिका मंजू और कंप्यूटर शिक्षिका प्रियंका का विशेष योगदान रहा। प्रधानाचार्य रितु जम्वाल ने इसे स्कूल के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है। जिला शिक्षा उपनिदेशक (सेकेंडरी) कमलेश ठाकुर ने स्कूल पहुंचकर मॉडल का अवलोकन किया और छात्राओं की इस वैज्ञानिक सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयोग विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
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छात्राओं ने इस मॉडल को स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में विकसित किया है। निधि को इस मॉडल की प्रेरणा अपनी दादी के स्वभाव में आने वाले अचानक बदलावों को देखकर मिली। वर्तमान में यह मॉडल प्रोटोटाइप स्तर पर है, लेकिन छात्राओं का लक्ष्य इसे भविष्य में एक अंगूठी (रिंग) या रिस्ट बैंड जैसा छोटा और पहनने योग्य डिवाइस बनाना है।
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छात्रा निधि का कहना है कि आज के दौर में युवा अक्सर मानसिक तनाव से गुजरते हैं और अपनी बात साझा नहीं कर पाते। यह तकनीक उनके भावनात्मक संकेतों को समय रहते पकड़ लेगी। इससे न केवल उन्हें सही समय पर मदद मिल सकेगी, बल्कि गंभीर स्थितियों में जान बचाना भी संभव होगा।
इस प्रोजेक्ट में मेंटर सन्नी, भौतिकी की शिक्षिका मंजू और कंप्यूटर शिक्षिका प्रियंका का विशेष योगदान रहा। प्रधानाचार्य रितु जम्वाल ने इसे स्कूल के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है। जिला शिक्षा उपनिदेशक (सेकेंडरी) कमलेश ठाकुर ने स्कूल पहुंचकर मॉडल का अवलोकन किया और छात्राओं की इस वैज्ञानिक सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयोग विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
