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Kangra News: परागपुर की विरासत को प्रशासनिक संजीवनी का इंतजार
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परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के गौरवमयी इतिहास में परागपुर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है, लेकिन विकास की दौड़ में यह कस्बा एक ऐसी पहेली बन गया है, जहां अतीत तो सुनहरा था, पर भविष्य धुंधला पड़ता गया।
25 जनवरी को मुख्यमंत्री का परागपुर दौरा महज एक औपचारिक सरकारी प्रवास नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक क्षेत्र के भाग्य को पुनर्जीवित करने का एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। 50 के दशक में जब परागपुर पंजाब का एक विकसित केंद्र था, तब यहां के अस्पताल की रोशनी और ब्लॉक कार्यालय की धमक दूर-दूर तक सुनाई देती थी। आज वही अस्पताल अपनी पहचान खोकर पीएचसी के रूप में सिसक रहा है, जो विकास के प्रतिगामी होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मुख्यमंत्री के इस दौरे से जनता को उम्मीद है कि जो अस्पताल दशकों पहले 24 घंटे सेवाएं देता था, उसे दोबारा आधुनिक सुविधाओं से लैस कर एक बड़े चिकित्सा संस्थान में बदला जाएगा। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से अपेक्षा की जा रही है कि वह परागपुर को केवल हेरिटेज की बंदिशों में न रखकर, इसे एक आधुनिक प्रशासनिक हब के रूप में विकसित करने की घोषणा करेंगे। 25 जनवरी की यह तारीख परागपुर के लिए उस ग्रहण को हटाने का अवसर है, जिसने दशकों से इस क्षेत्र के विकास को रोक रखा है। स्थानीय निवासियों की ओर से उठाई गई एसडीएम कार्यालय की मांग दरअसल परागपुर को उस प्रशासनिक गौरव से जोड़ने की कड़ी है, जो उसे पंजाब सरकार के समय से हासिल था। अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री परागपुर की इस विकास की प्यास को बुझाकर इसे पुनः प्रदेश के मानचित्र पर एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं या नहीं।
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25 जनवरी को मुख्यमंत्री का परागपुर दौरा महज एक औपचारिक सरकारी प्रवास नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक क्षेत्र के भाग्य को पुनर्जीवित करने का एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। 50 के दशक में जब परागपुर पंजाब का एक विकसित केंद्र था, तब यहां के अस्पताल की रोशनी और ब्लॉक कार्यालय की धमक दूर-दूर तक सुनाई देती थी। आज वही अस्पताल अपनी पहचान खोकर पीएचसी के रूप में सिसक रहा है, जो विकास के प्रतिगामी होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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मुख्यमंत्री के इस दौरे से जनता को उम्मीद है कि जो अस्पताल दशकों पहले 24 घंटे सेवाएं देता था, उसे दोबारा आधुनिक सुविधाओं से लैस कर एक बड़े चिकित्सा संस्थान में बदला जाएगा। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से अपेक्षा की जा रही है कि वह परागपुर को केवल हेरिटेज की बंदिशों में न रखकर, इसे एक आधुनिक प्रशासनिक हब के रूप में विकसित करने की घोषणा करेंगे। 25 जनवरी की यह तारीख परागपुर के लिए उस ग्रहण को हटाने का अवसर है, जिसने दशकों से इस क्षेत्र के विकास को रोक रखा है। स्थानीय निवासियों की ओर से उठाई गई एसडीएम कार्यालय की मांग दरअसल परागपुर को उस प्रशासनिक गौरव से जोड़ने की कड़ी है, जो उसे पंजाब सरकार के समय से हासिल था। अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री परागपुर की इस विकास की प्यास को बुझाकर इसे पुनः प्रदेश के मानचित्र पर एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं या नहीं।