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Kangra News: निजी फर्म ने नहीं चुकाया बैंक का ऋण, अब ब्याज सहित देने होंगे 12.37 लाख
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 16 Mar 2026 07:04 AM IST
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धर्मशाला। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश प्रतिभा नेगी की अदालत ने बैंक ऋण की अदायगी न करने के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने निजी फर्म के मालिक को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कांगड़ा शाखा को 12,37,672 रुपये की राशि 11 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार फर्म के प्रोप्राइटर ने 20 अगस्त 2018 को अपने व्यापार के लिए 10 लाख रुपये की वर्किंग कैपिटल कैश क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया था। बैंक ने 24 अगस्त 2018 को यह ऋण स्वीकृत किया। हालांकि ऋण लेने के बाद उधारकर्ता ने बैंक के साथ हुए समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और व्यापारिक आय को ऋण खाते के माध्यम से संचालित नहीं किया।
बैंक द्वारा बार-बार खाते को नियमित करने के आग्रह के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं की गई, जिसके चलते 28 जुलाई 2019 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। बैंक द्वारा 10 जुलाई 2019 को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी जब कोई भुगतान नहीं हुआ तो बैंक ने वसूली के लिए सिविल मुकदमा दायर किया।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी को कई बार समन भेजे गए, लेकिन अदालत में उपस्थित न होने के कारण 24 मार्च 2025 को उन्हें एकतरफा (एक्स-पार्टी) कर दिया गया। अदालत ने बैंक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देते हुए आदेश दिया कि प्रतिवादी को वाद दायर होने की तिथि से भुगतान तक 11 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि अदा करनी होगी।
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मामले के अनुसार फर्म के प्रोप्राइटर ने 20 अगस्त 2018 को अपने व्यापार के लिए 10 लाख रुपये की वर्किंग कैपिटल कैश क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया था। बैंक ने 24 अगस्त 2018 को यह ऋण स्वीकृत किया। हालांकि ऋण लेने के बाद उधारकर्ता ने बैंक के साथ हुए समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और व्यापारिक आय को ऋण खाते के माध्यम से संचालित नहीं किया।
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बैंक द्वारा बार-बार खाते को नियमित करने के आग्रह के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं की गई, जिसके चलते 28 जुलाई 2019 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। बैंक द्वारा 10 जुलाई 2019 को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी जब कोई भुगतान नहीं हुआ तो बैंक ने वसूली के लिए सिविल मुकदमा दायर किया।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी को कई बार समन भेजे गए, लेकिन अदालत में उपस्थित न होने के कारण 24 मार्च 2025 को उन्हें एकतरफा (एक्स-पार्टी) कर दिया गया। अदालत ने बैंक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देते हुए आदेश दिया कि प्रतिवादी को वाद दायर होने की तिथि से भुगतान तक 11 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि अदा करनी होगी।