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Kangra News: हुनर बना सहारा...शृंगार से संवारी जिंदगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। हुनर, हिम्मत और परिवार के सहयोग से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है, इसका जीवंत उदाहरण हैं सुनीता। वर्ष 2001 में ब्यूटीशियन का काम शुरू करने वाली सुनीता आज स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 30 से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं।
पति के निरंतर प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग से उन्होंने अपने हुनर को व्यवसाय में बदला और इसी हुनर को निहार कर अब सुनीता सालाना आठ लाख रुपये से अधिक टर्नओवर कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। 47 वर्षीय सुनीता जीवन चौहान थुरल की रहने वाली हैं। उनको ब्यूटीशियन का काम करते हुए 25 साल हो चुके हैं। वह कांगड़ा सहित अन्य जिलों में भी दुल्हनों को तैयार करने के लिए पहुंचती हैं। नया सीखने के लिए वह वर्ष 2024 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने कोदरे सहित अन्य मोटे अनाज से सिड्डू, मोमो, चाऊमीन आदि बनाना सिखा। इसके बाद उन्हें दुकान खोलने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइलेंस भी मिल गया। साथ ही उन्होंने अपने साथ आठ समूह बनाकर अन्य महिलाओं को सिखाना भी शुरू किया। वर्तमान में उनके साथ 30 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं, जो आत्मनिर्भर बन कर प्रति माह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। सुनीता ने अपनी सफलता का श्रेय पति को दिया है।
पति से मिला प्रोत्साहन
सुनीता ने बताया कि वह बैजनाथ के उतराला की रहने वाली हैं। वह दिल्ली में ही पली-बड़ी हैं। इसके बाद 19 वर्ष की आयु में उनकी शादी थुरल निवासी जीवन चौहान से हो गई। इस दौरान उनके पति ने उन्हें जीवन में कुछ करने की सलाह दी। सलाह मिलने के बाद उन्होंने दो साल का ब्यूटीशियन का कोर्स किया। वर्ष 2024 में स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली। समूह के साथ जुड़कर उन्होंने खाने के साथ हर्बल उत्पाद भी बनाना शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि समय की कदर और परिवार का सहयोग महिलाओं को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
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धर्मशाला। हुनर, हिम्मत और परिवार के सहयोग से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है, इसका जीवंत उदाहरण हैं सुनीता। वर्ष 2001 में ब्यूटीशियन का काम शुरू करने वाली सुनीता आज स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 30 से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं।
पति के निरंतर प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग से उन्होंने अपने हुनर को व्यवसाय में बदला और इसी हुनर को निहार कर अब सुनीता सालाना आठ लाख रुपये से अधिक टर्नओवर कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। 47 वर्षीय सुनीता जीवन चौहान थुरल की रहने वाली हैं। उनको ब्यूटीशियन का काम करते हुए 25 साल हो चुके हैं। वह कांगड़ा सहित अन्य जिलों में भी दुल्हनों को तैयार करने के लिए पहुंचती हैं। नया सीखने के लिए वह वर्ष 2024 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने कोदरे सहित अन्य मोटे अनाज से सिड्डू, मोमो, चाऊमीन आदि बनाना सिखा। इसके बाद उन्हें दुकान खोलने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइलेंस भी मिल गया। साथ ही उन्होंने अपने साथ आठ समूह बनाकर अन्य महिलाओं को सिखाना भी शुरू किया। वर्तमान में उनके साथ 30 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं, जो आत्मनिर्भर बन कर प्रति माह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। सुनीता ने अपनी सफलता का श्रेय पति को दिया है।
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पति से मिला प्रोत्साहन
सुनीता ने बताया कि वह बैजनाथ के उतराला की रहने वाली हैं। वह दिल्ली में ही पली-बड़ी हैं। इसके बाद 19 वर्ष की आयु में उनकी शादी थुरल निवासी जीवन चौहान से हो गई। इस दौरान उनके पति ने उन्हें जीवन में कुछ करने की सलाह दी। सलाह मिलने के बाद उन्होंने दो साल का ब्यूटीशियन का कोर्स किया। वर्ष 2024 में स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली। समूह के साथ जुड़कर उन्होंने खाने के साथ हर्बल उत्पाद भी बनाना शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि समय की कदर और परिवार का सहयोग महिलाओं को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
