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Kangra News: सौर सिंचाई से बदली खेती की तस्वीर,सब्जी उत्पादन बढ़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 12 Jan 2026 05:40 AM IST
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पहाड़ में मजबूत हुई किसानों की आर्थिक स्थिति, बिजली-डीजल पर निर्भरता घटी
कृषि विभाग की योजनाओं से किसानों को मिला स्थायी लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सिंचाई हमेशा से खेती की सबसे बड़ी चुनौती रही है। अधिकतर क्षेत्र वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहे हैं, लेकिन अब सौर सिंचाई सहित आधुनिक कृषि योजनाओं ने खेती की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग की पहल से जल संरक्षण टैंक, लिफ्ट इरिगेशन, कूहलें, स्प्रिंकलर, ड्रिप और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
कृषि विभाग के उप निदेशक कुलदीप धीमान ने बताया कि सिंचाई केवल सुविधा नहीं, बल्कि कृषि विकास की रीढ़ है। विशेषकर सब्जी वगीर्य फसलों के लिए नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। ऐसे में सौर सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों को बिजली कटौती और डीजल खर्च से राहत मिली है।
उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा आधारित पंप कम लागत में लंबे समय तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत घटी और मुनाफा बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की ओर से टैंक निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और जल संप्रेषण जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। कई क्षेत्रों में दो से चार किसानों ने मिलकर सामूहिक रूप से सौर सिंचाई अपनाई है, जिससे बड़े क्षेत्र में सब्जी उत्पादन संभव हो पाया है। जहां पहले जमीन असिंचित पड़ी रहती थी, वहां अब नकदी फसलें उगाई जा रही हैं।
इस योजना के बारे में जिला कांगड़ा के बल्ला और सहौड़ा गांव के प्रगतिशील किसान राम कृष्ण सैनी, सुनील कुमार, करतार चंद और प्रेम सिंह का कहना है उन्हें बहाव सिंचाई, सौर सिंचाई, जल भंडारण, सूक्ष्म सिंचाई और पॉलीहाउस जैसी योजनाओं का लाभ मिला है। शैलो बोरवेल, सौर मोटर, 1.25 लाख लीटर का जल भंडारण टैंक और पॉलीहाउस से अब उन्हें सालभर सिंचाई और सुरक्षित खेती की सुविधा मिल रही है। किसानों का कहना है कि इन योजनाओं से न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी बल मिला है।
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कृषि विभाग की योजनाओं से किसानों को मिला स्थायी लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सिंचाई हमेशा से खेती की सबसे बड़ी चुनौती रही है। अधिकतर क्षेत्र वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहे हैं, लेकिन अब सौर सिंचाई सहित आधुनिक कृषि योजनाओं ने खेती की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग की पहल से जल संरक्षण टैंक, लिफ्ट इरिगेशन, कूहलें, स्प्रिंकलर, ड्रिप और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
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कृषि विभाग के उप निदेशक कुलदीप धीमान ने बताया कि सिंचाई केवल सुविधा नहीं, बल्कि कृषि विकास की रीढ़ है। विशेषकर सब्जी वगीर्य फसलों के लिए नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। ऐसे में सौर सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों को बिजली कटौती और डीजल खर्च से राहत मिली है।
उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा आधारित पंप कम लागत में लंबे समय तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत घटी और मुनाफा बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की ओर से टैंक निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और जल संप्रेषण जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। कई क्षेत्रों में दो से चार किसानों ने मिलकर सामूहिक रूप से सौर सिंचाई अपनाई है, जिससे बड़े क्षेत्र में सब्जी उत्पादन संभव हो पाया है। जहां पहले जमीन असिंचित पड़ी रहती थी, वहां अब नकदी फसलें उगाई जा रही हैं।
इस योजना के बारे में जिला कांगड़ा के बल्ला और सहौड़ा गांव के प्रगतिशील किसान राम कृष्ण सैनी, सुनील कुमार, करतार चंद और प्रेम सिंह का कहना है उन्हें बहाव सिंचाई, सौर सिंचाई, जल भंडारण, सूक्ष्म सिंचाई और पॉलीहाउस जैसी योजनाओं का लाभ मिला है। शैलो बोरवेल, सौर मोटर, 1.25 लाख लीटर का जल भंडारण टैंक और पॉलीहाउस से अब उन्हें सालभर सिंचाई और सुरक्षित खेती की सुविधा मिल रही है। किसानों का कहना है कि इन योजनाओं से न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी बल मिला है।