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Kangra News: विद्यार्थियों में बढ़ा परीक्षा तनाव, परामर्श के लिए पहुंच रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 08 Mar 2026 04:39 AM IST
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खास खबर...
दूसरे से आगे निकलने की होड़ और बेहतर परिणाम देने के लिए तनाव में आ रहे विद्यार्थी
धर्मशाला अस्पताल में काउंसलर और मनोचिकित्सक के पास भीड़
सचिन चौधरी
धर्मशाला। वार्षिक परीक्षाएं शुरू होते ही विद्यार्थियों में तनाव का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। बेहतर परिणाम लाने और प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़ के चलते कई विद्यार्थी मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे में अब विद्यार्थी और उनके अभिभावक परामर्श के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
धर्मशाला अस्पताल में इन दिनों काउंसलर और मनोचिकित्सक के पास आने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना तनाव के चलते पांच से सात विद्यार्थी परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ बच्चों में तनाव इतना बढ़ गया है कि मनोचिकित्सक की ओर से उन्हें कुछ समय के लिए दवाइयां तक दी जा रही हैं। छात्र परीक्षा के डर, असफलता की चिंता और अधिक अपेक्षाओं के कारण तनाव, घबराहट और अनिद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
विद्यार्थी पढ़ाई के दबाव और परिवार की अपेक्षाओं के कारण मानसिक रूप से असहज महसूस करते हैं। कुछ छात्र परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित न कर पाने, घबराहट और आत्मविश्वास की कमी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई छात्र अपनी तैयारी के बावजूद परिणाम को लेकर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं, जिससे उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है और परीक्षा में वे बेहतर नहीं कर पा रहे हैं।
कोट्स...
परीक्षाओं के तनाव के कारण इन दिनों अस्पताल में रोजाना पांच के करीब बच्चे परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। विद्यार्थी परीक्षा के दौरान नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार पर ध्यान दें। साथ ही पढ़ाई के बीच-बीच में थोड़ी देर आराम और मनोरंजन भी जरूरी है, जिससे मानसिक दबाव कम हो सके। परिजन भी बच्चों को समझाएं कि अगर कुछ अंक कम भी आ जाएं तो कोई बात नहीं। अभिभावकों को भी सलाह दी है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं और उन्हें सकारात्मक माहौल दें। - रीना कुमारी, किशोर परामर्शदाता, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
कोट्स...
बच्चे इस तरह से कम करें तनाव : डॉ. अनीता ठाकुर
- लिए पढ़ाई की सही योजना बनाएं। सभी विषयों को थोड़ा-थोड़ा समय दें। परीक्षा के दौरान देर रात तक जागने से तनाव और थकान बढ़ती है। रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। लगातार कई घंटे पढ़ने से मानसिक थकान हो सकती है। हर 40-50 मिनट के बाद 5-10 मिनट का छोटा ब्रेक लें। संतुलित आहार लें। फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन लें और ज्यादा जंक फूड या कैफीन लेने से बचें। प्रतिदिन थोड़ी देर टहलना, योग या प्राणायाम करने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है। हर विद्यार्थी की क्षमता अलग होती है। दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान दें। पढ़ाई या परीक्षा को लेकर ज्यादा चिंता हो तो परिजनों, शिक्षकों या काउंसलर से बात करें। परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, इसलिए बच्चे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें।
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धर्मशाला अस्पताल में काउंसलर और मनोचिकित्सक के पास भीड़
सचिन चौधरी
धर्मशाला। वार्षिक परीक्षाएं शुरू होते ही विद्यार्थियों में तनाव का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। बेहतर परिणाम लाने और प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़ के चलते कई विद्यार्थी मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे में अब विद्यार्थी और उनके अभिभावक परामर्श के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
धर्मशाला अस्पताल में इन दिनों काउंसलर और मनोचिकित्सक के पास आने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना तनाव के चलते पांच से सात विद्यार्थी परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ बच्चों में तनाव इतना बढ़ गया है कि मनोचिकित्सक की ओर से उन्हें कुछ समय के लिए दवाइयां तक दी जा रही हैं। छात्र परीक्षा के डर, असफलता की चिंता और अधिक अपेक्षाओं के कारण तनाव, घबराहट और अनिद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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विद्यार्थी पढ़ाई के दबाव और परिवार की अपेक्षाओं के कारण मानसिक रूप से असहज महसूस करते हैं। कुछ छात्र परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित न कर पाने, घबराहट और आत्मविश्वास की कमी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई छात्र अपनी तैयारी के बावजूद परिणाम को लेकर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं, जिससे उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है और परीक्षा में वे बेहतर नहीं कर पा रहे हैं।
कोट्स...
परीक्षाओं के तनाव के कारण इन दिनों अस्पताल में रोजाना पांच के करीब बच्चे परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। विद्यार्थी परीक्षा के दौरान नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार पर ध्यान दें। साथ ही पढ़ाई के बीच-बीच में थोड़ी देर आराम और मनोरंजन भी जरूरी है, जिससे मानसिक दबाव कम हो सके। परिजन भी बच्चों को समझाएं कि अगर कुछ अंक कम भी आ जाएं तो कोई बात नहीं। अभिभावकों को भी सलाह दी है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं और उन्हें सकारात्मक माहौल दें। - रीना कुमारी, किशोर परामर्शदाता, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
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बच्चे इस तरह से कम करें तनाव : डॉ. अनीता ठाकुर
- लिए पढ़ाई की सही योजना बनाएं। सभी विषयों को थोड़ा-थोड़ा समय दें। परीक्षा के दौरान देर रात तक जागने से तनाव और थकान बढ़ती है। रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। लगातार कई घंटे पढ़ने से मानसिक थकान हो सकती है। हर 40-50 मिनट के बाद 5-10 मिनट का छोटा ब्रेक लें। संतुलित आहार लें। फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन लें और ज्यादा जंक फूड या कैफीन लेने से बचें। प्रतिदिन थोड़ी देर टहलना, योग या प्राणायाम करने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है। हर विद्यार्थी की क्षमता अलग होती है। दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान दें। पढ़ाई या परीक्षा को लेकर ज्यादा चिंता हो तो परिजनों, शिक्षकों या काउंसलर से बात करें। परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, इसलिए बच्चे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें।