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Kangra News: बीमा कंपनी नौ फीसदी ब्याज के साथ देना होगा इलाज का खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 08 Mar 2026 05:19 AM IST
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इलाज खर्च के भुगतान का दावा अस्वीकार उपभोक्ता आयोग में की थी शिकायत
आयोग ने 10 हजार मुआवजा और 10 हजार मुकदमा खर्च देने का सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। स्वास्थ्य बीमा होने पर उपचार के बाद क्लेम राशि देने से मना करने पर इंश्यारेंस कंपनी को 9 फीसदी ब्याज के साथ 35,103 रुपये का भुगतान करना होगा। बीमा कंपनी को 10 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार मुकदमा खर्च देने के भी आदेश दिए गए हैं।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। आयोग के समक्ष डॉ. काहन बस्सी निवासी टांडा रोड, घुग्घर तहसील पालमपुर ने शिकायत दर्ज करवाई थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एक दीर्घकालिक पॉलिसी धारक हैं। इसके बाद वर्ष 2018 में अपनी बीमा पॉलिसी को मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में स्थानांतरित कराया था। इस चिकित्सा बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण 25 मार्च 2022 से 24 मार्च 2023 तक 5.50 लाख रुपये की राशि के लिए कराया। इसके लिए उन्होंने प्रीमियम राशि 75,892.86 रुपये का भुगतान भी किया। उन्होंने कहा कि 26 मई 2022 को तीव्र एलर्जिक ब्रोंकाइटिस हो गया और उनका 26 से 28 मई 2022 तक कांगड़ा स्थित निजी अस्पताल में उपचार चला। इस पर चिकित्सा व्यय 35,103 रुपये था।
उन्होंने कहा कि इलाज खर्च भुगतान के लिए उन्होंने बीमा कंपनी से संपर्क किया और दस्तावेज भी भेजे, लेकिन 16 जून 2022 को दावे को अस्वीकार कर दिया। कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें 20 वर्षों से अधिक समय से सीओपीडी (सिस्टिक ओपीडी) की समस्या है, जो पॉलिसी शुरू होने से पहले की है और प्रस्ताव फार्म में इसका खुलासा नहीं किया था। उन्होंने कहा कि डिस्चार्ज समरी में स्पष्ट रूप से उपचार का विवरण है, जिसमें बताया गया है कि रोगी का इलाज एंटीबायोटिक्स, नेबुलाइजेशन, एंटी एलर्जिक और अन्य सहायक उपायों से किया था। इसमें किसी भी गंभीर बीमारी के लंबे समय से चले आ रहे इतिहास का कोई उल्लेख नहीं है। आयोग के समक्ष पहुंची शिकायत के सभी तथ्यों को जांचने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। स्वास्थ्य बीमा होने पर उपचार के बाद क्लेम राशि देने से मना करने पर इंश्यारेंस कंपनी को 9 फीसदी ब्याज के साथ 35,103 रुपये का भुगतान करना होगा। बीमा कंपनी को 10 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार मुकदमा खर्च देने के भी आदेश दिए गए हैं।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। आयोग के समक्ष डॉ. काहन बस्सी निवासी टांडा रोड, घुग्घर तहसील पालमपुर ने शिकायत दर्ज करवाई थी।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एक दीर्घकालिक पॉलिसी धारक हैं। इसके बाद वर्ष 2018 में अपनी बीमा पॉलिसी को मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में स्थानांतरित कराया था। इस चिकित्सा बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण 25 मार्च 2022 से 24 मार्च 2023 तक 5.50 लाख रुपये की राशि के लिए कराया। इसके लिए उन्होंने प्रीमियम राशि 75,892.86 रुपये का भुगतान भी किया। उन्होंने कहा कि 26 मई 2022 को तीव्र एलर्जिक ब्रोंकाइटिस हो गया और उनका 26 से 28 मई 2022 तक कांगड़ा स्थित निजी अस्पताल में उपचार चला। इस पर चिकित्सा व्यय 35,103 रुपये था।
उन्होंने कहा कि इलाज खर्च भुगतान के लिए उन्होंने बीमा कंपनी से संपर्क किया और दस्तावेज भी भेजे, लेकिन 16 जून 2022 को दावे को अस्वीकार कर दिया। कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें 20 वर्षों से अधिक समय से सीओपीडी (सिस्टिक ओपीडी) की समस्या है, जो पॉलिसी शुरू होने से पहले की है और प्रस्ताव फार्म में इसका खुलासा नहीं किया था। उन्होंने कहा कि डिस्चार्ज समरी में स्पष्ट रूप से उपचार का विवरण है, जिसमें बताया गया है कि रोगी का इलाज एंटीबायोटिक्स, नेबुलाइजेशन, एंटी एलर्जिक और अन्य सहायक उपायों से किया था। इसमें किसी भी गंभीर बीमारी के लंबे समय से चले आ रहे इतिहास का कोई उल्लेख नहीं है। आयोग के समक्ष पहुंची शिकायत के सभी तथ्यों को जांचने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।