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आरक्षण का आधार जाति नहीं, केवल गरीबी हो : शांता कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 08 Mar 2026 07:28 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने देश की वर्तमान आरक्षण व्यवस्था और बढ़ती आर्थिक विषमता पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि स्वतंत्रता के बाद पिछले 50 वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति में व्यापक बदलाव आया है, इसलिए अब किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता या आरक्षण का आधार जाति न होकर केवल गरीबी होना चाहिए।
शांता कुमार ने कहा कि भारत आज विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है और अरबपतियों की संख्या में भी पांचवें स्थान पर है, लेकिन विडंबना यह है कि दुनिया के सबसे अधिक गरीब भी यहीं रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की असली समस्या गरीबी नहीं, बल्कि आर्थिक विषमता है। उनके अनुसार कुछ लोग बहुत अधिक अमीर हो रहे हैं, जबकि एक बड़ा वर्ग विकास की दौड़ में पिछड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आरक्षित जातियों के भीतर भी एक प्रभावशाली क्रीमी लेयर बन गई है, जो बार-बार आरक्षण का लाभ उठा रही है, जबकि उसी वर्ग के वास्तविक जरूरतमंद आज भी वंचित हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संपन्न वर्ग को आरक्षण के दायरे से तुरंत बाहर किया जाना चाहिए।
शांता कुमार ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार सहायता का आधार केवल आर्थिक स्थिति को बनाएगी, तो देश से गरीबी जल्द दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जातिगत आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर नीतियां बनाई जाएं, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सही मायने में पहुंच सके।
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शांता कुमार ने कहा कि भारत आज विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है और अरबपतियों की संख्या में भी पांचवें स्थान पर है, लेकिन विडंबना यह है कि दुनिया के सबसे अधिक गरीब भी यहीं रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की असली समस्या गरीबी नहीं, बल्कि आर्थिक विषमता है। उनके अनुसार कुछ लोग बहुत अधिक अमीर हो रहे हैं, जबकि एक बड़ा वर्ग विकास की दौड़ में पिछड़ रहा है।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आरक्षित जातियों के भीतर भी एक प्रभावशाली क्रीमी लेयर बन गई है, जो बार-बार आरक्षण का लाभ उठा रही है, जबकि उसी वर्ग के वास्तविक जरूरतमंद आज भी वंचित हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संपन्न वर्ग को आरक्षण के दायरे से तुरंत बाहर किया जाना चाहिए।
शांता कुमार ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार सहायता का आधार केवल आर्थिक स्थिति को बनाएगी, तो देश से गरीबी जल्द दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जातिगत आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर नीतियां बनाई जाएं, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सही मायने में पहुंच सके।