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टीबी-एचआईवी दवाओं से नहीं, जागरूकता से होंगी समाप्त : डॉ. सूद
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 23 Jan 2026 07:10 AM IST
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कन्या विद्यालय नगरोटा बगवां में कार्यक्रम के दौरान युवाओं को किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। राष्ट्रीय युवा दिवस पर कन्या स्कूल नगरोटा बगवां में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वर्ष 2030 तक क्षय रोग और एचआईवी/ एड्स के उन्मूलन पर विशेष जोर दिया गया। आयोजन की अध्यक्षता प्रधानाचार्य निखिल शर्मा ने की।
कार्यक्रम का संचालन जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने किया। उन्होंने कहा कि टीबी और एचआईवी जैसी बीमारियां केवल दवाओं से नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक सहयोग से समाप्त होंगी। समय पर जांच, नियमित उपचार और समाज से मिलने वाला समर्थन ही इन बीमारियों के उन्मूलन की कुंजी है।
युवा यदि ठान लें तो टीबी और एचआईवी को हर घर, हर गली से खत्म किया जा सकता है। प्रधानाचार्य ने कहा कि युवा केवल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लाभार्थी ही नहीं, बल्कि परिवर्तन के सशक्त भागीदार हैं। युवाओं की ऊर्जा नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक पहुंच टीबी और एचआईवी उन्मूलन के प्रयासों को नई दिशा दे सकती है। यदि युवा आगे आएं तो 2030 तक इन बीमारियों के अंत का लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकता है।
टीबी और एचआईवी के नियंत्रण में सामाजिक कलंक और भेदभाव आज भी एक बड़ी चुनौती है, इस कारण लोग समय पर जांच और उपचार से वंचित रह जाते हैं। प्रतिभागियों को जागरूकता फैलाने, मिथकों को दूर करने, सहकर्मी शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया गया। इस मौके पर जिला क्षय रोग केंद्र धर्मशाला से विशाल शर्मा, संजीव कुमार, अंकुश, मनोज, ब्लॉक पर्यवेक्षक संजीव चौधरी आदि उपस्थित रहे।
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नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। राष्ट्रीय युवा दिवस पर कन्या स्कूल नगरोटा बगवां में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वर्ष 2030 तक क्षय रोग और एचआईवी/ एड्स के उन्मूलन पर विशेष जोर दिया गया। आयोजन की अध्यक्षता प्रधानाचार्य निखिल शर्मा ने की।
कार्यक्रम का संचालन जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने किया। उन्होंने कहा कि टीबी और एचआईवी जैसी बीमारियां केवल दवाओं से नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक सहयोग से समाप्त होंगी। समय पर जांच, नियमित उपचार और समाज से मिलने वाला समर्थन ही इन बीमारियों के उन्मूलन की कुंजी है।
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युवा यदि ठान लें तो टीबी और एचआईवी को हर घर, हर गली से खत्म किया जा सकता है। प्रधानाचार्य ने कहा कि युवा केवल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लाभार्थी ही नहीं, बल्कि परिवर्तन के सशक्त भागीदार हैं। युवाओं की ऊर्जा नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक पहुंच टीबी और एचआईवी उन्मूलन के प्रयासों को नई दिशा दे सकती है। यदि युवा आगे आएं तो 2030 तक इन बीमारियों के अंत का लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकता है।
टीबी और एचआईवी के नियंत्रण में सामाजिक कलंक और भेदभाव आज भी एक बड़ी चुनौती है, इस कारण लोग समय पर जांच और उपचार से वंचित रह जाते हैं। प्रतिभागियों को जागरूकता फैलाने, मिथकों को दूर करने, सहकर्मी शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया गया। इस मौके पर जिला क्षय रोग केंद्र धर्मशाला से विशाल शर्मा, संजीव कुमार, अंकुश, मनोज, ब्लॉक पर्यवेक्षक संजीव चौधरी आदि उपस्थित रहे।