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Kangra News: जान गंवाने वाले सुरानी के ट्रक चालक के आश्रितों को मिलेगा 17.54 लाख मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 25 Mar 2026 05:42 AM IST
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धर्मशाला। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण देहरा की अदालत ने एक अहम फैसले में सड़क हादसे का शिकार हुए ट्रक चालक के आश्रितों को 17,54,848 रुपये मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं। पीठासीन अधिकारी सपना पांडेय की अदालत ने यह राहत मृतक की पत्नी, बच्चों और माता-पिता को देने का निर्णय सुनाया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुआवजे की यह राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज (याचिका दायर करने की तिथि से) के साथ दी जाएगी। साथ ही 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च भी अदा करना होगा। यह पूरी राशि चालक और वाहन मालिक की ओर से बीमा कंपनी (एसबीआई जनरल इंश्योरेंस) द्वारा वहन की जाएगी।
मामला 11 अप्रैल 2014 का है। तहसील खुंडियां के सुरानी निवासी ट्रक चालक नसीब दीन आंध्र प्रदेश से सामान लेकर दिल्ली जा रहे थे। राजस्थान के कोटपूतली के पास एक अन्य ट्रक चालक ने लापरवाही से ओवरटेक किया और अचानक ब्रेक लगा दी। इससे नसीब दीन का ट्रक अनियंत्रित होकर टकरा गया और गंभीर चोटों के कारण 12 अप्रैल 2014 को उनकी मृत्यु हो गई।
नसीब दीन ही अपने परिवार का एकमात्र सहारा और कमाने वाला सदस्य था। इसको देखते हुए अदालत ने मुआवजे के वितरण संबंधी स्पष्ट आदेश दिए हैं। आदेश के अनुसार कुल राशि का 60 फीसदी हिस्सा पत्नी, 10-10 फीसदी माता-पिता और नाबालिग पुत्र-पुत्री को भी 10-10 फीसदी हिस्सा दिया जाएगा। नाबालिग बच्चों के हिस्से की राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी के रूप में जमा की जाएगी, जो उनके वयस्क होने पर ही उन्हें प्राप्त होगी।
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अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुआवजे की यह राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज (याचिका दायर करने की तिथि से) के साथ दी जाएगी। साथ ही 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च भी अदा करना होगा। यह पूरी राशि चालक और वाहन मालिक की ओर से बीमा कंपनी (एसबीआई जनरल इंश्योरेंस) द्वारा वहन की जाएगी।
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मामला 11 अप्रैल 2014 का है। तहसील खुंडियां के सुरानी निवासी ट्रक चालक नसीब दीन आंध्र प्रदेश से सामान लेकर दिल्ली जा रहे थे। राजस्थान के कोटपूतली के पास एक अन्य ट्रक चालक ने लापरवाही से ओवरटेक किया और अचानक ब्रेक लगा दी। इससे नसीब दीन का ट्रक अनियंत्रित होकर टकरा गया और गंभीर चोटों के कारण 12 अप्रैल 2014 को उनकी मृत्यु हो गई।
नसीब दीन ही अपने परिवार का एकमात्र सहारा और कमाने वाला सदस्य था। इसको देखते हुए अदालत ने मुआवजे के वितरण संबंधी स्पष्ट आदेश दिए हैं। आदेश के अनुसार कुल राशि का 60 फीसदी हिस्सा पत्नी, 10-10 फीसदी माता-पिता और नाबालिग पुत्र-पुत्री को भी 10-10 फीसदी हिस्सा दिया जाएगा। नाबालिग बच्चों के हिस्से की राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी के रूप में जमा की जाएगी, जो उनके वयस्क होने पर ही उन्हें प्राप्त होगी।