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Kangra News: जमीन विक्रेता को सात फीसदी ब्याज के साथ लौटाने होंगे 3.50 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 09 Apr 2026 05:52 AM IST
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धर्मशाला। जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विक्रेता को आदेश दिए हैं कि वह खरीदार को 3.50 लाख रुपये की बयाना राशि (अग्रिम राशि) 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। जिला न्यायालय ने निचली अदालत के उस निर्णय को भी पलट दिया है जो पहले विक्रेता के पक्ष में आया था।
मामले के अनुसार धर्मशाला क्षेत्र के एक व्यक्ति ने वर्ष 2016 में करीब 28 लाख रुपये में जमीन का सौदा तय किया था और 5 लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में दिए थे। विवाद होने पर विक्रेता ने केवल 1.50 लाख रुपये वापस किए और शेष राशि देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस समय समझौता हुआ, उस वक्त विक्रेता उस जमीन का मालिक ही नहीं था।
विक्रेता ने बाद में वह जमीन खरीदी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सौदे के वक्त तथ्य छिपाए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमीन का सौदा रद्द होने के लिए खरीदार नहीं, बल्कि विक्रेता जिम्मेदार था। कानून के अनुसार बयाना राशि तभी जब्त की जा सकती है जब गलती खरीदार की हो। चूंकि इस मामले में विक्रेता की ओर से खामियां पाई गईं, इसलिए अग्रिम राशि रोकना कानूनन उचित नहीं है। अदालत ने निचली अदालत के पिछले फैसले को खारिज करते हुए अब विक्रेता को ब्याज सहित पूरी बकाया राशि चुकाने के आदेश जारी किए हैं।
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मामले के अनुसार धर्मशाला क्षेत्र के एक व्यक्ति ने वर्ष 2016 में करीब 28 लाख रुपये में जमीन का सौदा तय किया था और 5 लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में दिए थे। विवाद होने पर विक्रेता ने केवल 1.50 लाख रुपये वापस किए और शेष राशि देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस समय समझौता हुआ, उस वक्त विक्रेता उस जमीन का मालिक ही नहीं था।
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विक्रेता ने बाद में वह जमीन खरीदी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सौदे के वक्त तथ्य छिपाए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमीन का सौदा रद्द होने के लिए खरीदार नहीं, बल्कि विक्रेता जिम्मेदार था। कानून के अनुसार बयाना राशि तभी जब्त की जा सकती है जब गलती खरीदार की हो। चूंकि इस मामले में विक्रेता की ओर से खामियां पाई गईं, इसलिए अग्रिम राशि रोकना कानूनन उचित नहीं है। अदालत ने निचली अदालत के पिछले फैसले को खारिज करते हुए अब विक्रेता को ब्याज सहित पूरी बकाया राशि चुकाने के आदेश जारी किए हैं।