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Kangra News: टीएमसी का हाल... ओपीडी 3000, केवल 12 डाटा एंट्री ऑपरेटर
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धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन व्यवस्थाएं वर्षों से जस की तस हैं। स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों और तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में केवल 12 डाटा एंट्री ऑपरेटर सेवाएं दे रहे हैं। मरीजों की संख्या के हिसाब से यह संख्या बेहद कम है। टांडा में रोजाना 3000 के करीब ओपीडी रहती है।
इसी कारण ओपीडी पर्ची काउंटर सहित विभिन्न पंजीकरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों को पर्ची बनवाने और अन्य औपचारिकताओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इसी के चलते मरीजों और स्टाफ के बीच नोक-झोंक के मामले भी सामने आते हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, टांडा में कई सालों से डाटा एंट्री ऑपरेटरों के पद नहीं भरे गए हैं। ऐसे में सीमित स्टाफ के साथ काम करना आसान नहीं है। कई बार सरकार को पद भरने के लिए कहा गया। अब टांडा में मनोचिकित्सक और मातृ-शिशु अस्पताल भी शुरू करने की तैयारी है। सुरक्षा कर्मचारी भी कम होने से टांडा के पर्ची सहित अन्य काउंटरों पर तनाव बढ़ता जा रहा है।
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सोमवार को भी टांडा मेडिकल कॉलेज के पर्ची काउंटर पर इसी तरह का मामला सामने आया था। एक महिला मरीज और डाटा एंट्री ऑपरेटर के बीच हाथापाई हो गई थी। इससे कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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टांडा अस्पताल में कई वर्षों से केवल 12 डाटा एंट्री ऑपरेटर ही मौजूद हैं। इस वजह से काम का बोझ बढ़ रहा है। सरकार को कई बार इन पदों को बढ़ाने के लिए लिखा गया है लेकिन स्थिति वैसे की वैसी ही है। -डॉ. विवेक बन्याल, एमएस, टांडा मेडिकल कॉलेज
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इसी कारण ओपीडी पर्ची काउंटर सहित विभिन्न पंजीकरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों को पर्ची बनवाने और अन्य औपचारिकताओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इसी के चलते मरीजों और स्टाफ के बीच नोक-झोंक के मामले भी सामने आते हैं।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, टांडा में कई सालों से डाटा एंट्री ऑपरेटरों के पद नहीं भरे गए हैं। ऐसे में सीमित स्टाफ के साथ काम करना आसान नहीं है। कई बार सरकार को पद भरने के लिए कहा गया। अब टांडा में मनोचिकित्सक और मातृ-शिशु अस्पताल भी शुरू करने की तैयारी है। सुरक्षा कर्मचारी भी कम होने से टांडा के पर्ची सहित अन्य काउंटरों पर तनाव बढ़ता जा रहा है।
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सोमवार को भी टांडा मेडिकल कॉलेज के पर्ची काउंटर पर इसी तरह का मामला सामने आया था। एक महिला मरीज और डाटा एंट्री ऑपरेटर के बीच हाथापाई हो गई थी। इससे कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
टांडा अस्पताल में कई वर्षों से केवल 12 डाटा एंट्री ऑपरेटर ही मौजूद हैं। इस वजह से काम का बोझ बढ़ रहा है। सरकार को कई बार इन पदों को बढ़ाने के लिए लिखा गया है लेकिन स्थिति वैसे की वैसी ही है। -डॉ. विवेक बन्याल, एमएस, टांडा मेडिकल कॉलेज