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Kangra News: मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का खतरा, खेतों में पहुंचे विशेषज्ञ

Sun, 28 Jun 2026 05:52 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 05:52 AM IST
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Threat of Fall Armyworm to maize crop; experts visit the fields.
जवाली की मतलाहड़ पंचायत में खेतों का निरीक्षण करते कृषि विशेषज्ञ। -स्रोत : विभाग
धर्मशाला। मक्की की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले फॉल आर्मी वर्म के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने कांगड़ा जिले में विशेष निगरानी एवं जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर और विभागीय विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने जवाली क्षेत्र की मतलाहड़ पंचायत में खेतों का निरीक्षण किया।
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इस दौरान अधिकारियों ने किसानों को इस कीट की पहचान और इसके वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी। राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला की कृषि विकास अधिकारी डॉ. रीता ठाकुर ने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि शुरुआती चरण में यह कीट पत्तियों पर छोटे छेद बनाता है जो बाद में बड़े सुराखों में बदल जाते हैं। किसान खेतों की नियमित निगरानी करें।
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उन्होंने कहा कि यदि कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो नीम आधारित कीटनाशी का प्रयोग करें। इससे अधिक प्रकोप होने पर विभाग द्वारा अनुशंसित एमामेक्टिन बेंजोएट या क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल (कोराजन) का निर्धारित मात्रा में ही छिड़काव करें। उन्होंने फूल आने के बाद रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने और प्रभावित पौधों को नष्ट करने की भी सलाह दी।
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उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डॉ. विशाखा पॉल ने कहा कि फॉल आर्मी वर्म बेहद तेजी से फैलने वाला कीट है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण न पाया गया, तो यह पूरी फसल को तबाह कर सकता है। इससे बचाव के लिए किसान फसल चक्र अपनाएं, खेतों की गहरी जुताई करें और फसल के अवशेषों को पूरी तरह नष्ट कर दें।

कृषि विकास अधिकारी डॉ. अखिलेश कौंडल ने किसानों को राहत देते हुए बताया कि विभाग द्वारा अनुमोदित कीटनाशक किसानों को उचित दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, डॉ. नेहा ठाकुर ने किसानों से विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और सामूहिक रूप से कीट प्रबंधन अपनाने की अपील की।
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