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Kangra News: चीन के खिलाफ तिब्बतियों ने शुरू किया ब्लैक हैट मार्च
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तिब्बत में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और सांस्कृतिक दमन के खिलाफ तिब्बती युवा कांग्रेस की ओर मंग
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धर्मशाला। निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री एवं सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने मंगलवार को मैक्लोडगंज से तिब्बती युवा कांग्रेस के शांतिपूर्ण ब्लैक हैट मार्च का औपचारिक शुभांरभ किया। इस मार्च में 60 से अधिक तिब्बती कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं।
ब्लैक हैट मार्च के माध्यम से चीन सरकार से तिब्बत में जबरन समावेशन की नीतियों को तुरंत बंद करने की मांग उठाई गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने चीन द्वारा लागू तथाकथित ‘जातीय एकता कानून’ के तहत तिब्बती पहचान, संस्कृति और भाषा पर हो रहे दमन की कड़ी निंदा की।
उन्होंने तिब्बत के पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के व्यवस्थित विनाश पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। 31 मार्च को इसकी शुरुआत ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1959 में तिब्बती आध्यात्मिक नेता 14वें दलाई लामा तिब्बती मंत्रिमंडल और हजारों अनुयायियों के साथ भारत आए थे। यह मार्च 25 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में समाप्त होगा, जो तिब्बत के 11वें पंचेन लामा के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।
निर्वासित तिब्बती सरकार के अनुसार पंचेन लामा को मात्र छह वर्ष की आयु में कथित रूप से अपहृत कर लिया गया था और आज तक उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
ब्लैक हैट मार्च के तहत तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं जिसमें जबरन समावेशन की नीतियों को समाप्त कर जातीय एकता कानून को निरस्त करना, पंचेन लामा सहित सभी तिब्बती राजनीतिक बंदियों को रिहा करना और तिब्बत को संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का केंद्र बनाना बंद कर वहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना शामिल हैं।
इस शांतिपूर्ण मार्च का मुख्य उद्देश्य तिब्बत के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और वहां हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है। ब्यूरो
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ब्लैक हैट मार्च के माध्यम से चीन सरकार से तिब्बत में जबरन समावेशन की नीतियों को तुरंत बंद करने की मांग उठाई गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने चीन द्वारा लागू तथाकथित ‘जातीय एकता कानून’ के तहत तिब्बती पहचान, संस्कृति और भाषा पर हो रहे दमन की कड़ी निंदा की।
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उन्होंने तिब्बत के पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के व्यवस्थित विनाश पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। 31 मार्च को इसकी शुरुआत ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1959 में तिब्बती आध्यात्मिक नेता 14वें दलाई लामा तिब्बती मंत्रिमंडल और हजारों अनुयायियों के साथ भारत आए थे। यह मार्च 25 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में समाप्त होगा, जो तिब्बत के 11वें पंचेन लामा के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।
निर्वासित तिब्बती सरकार के अनुसार पंचेन लामा को मात्र छह वर्ष की आयु में कथित रूप से अपहृत कर लिया गया था और आज तक उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
ब्लैक हैट मार्च के तहत तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं जिसमें जबरन समावेशन की नीतियों को समाप्त कर जातीय एकता कानून को निरस्त करना, पंचेन लामा सहित सभी तिब्बती राजनीतिक बंदियों को रिहा करना और तिब्बत को संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का केंद्र बनाना बंद कर वहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना शामिल हैं।
इस शांतिपूर्ण मार्च का मुख्य उद्देश्य तिब्बत के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और वहां हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है। ब्यूरो