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जनगणना-2027 : तथ्य छिपाए तो पड़ सकते हैं कानूनी पचड़े
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:01 PM IST
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खास खबर
घर, वाहन और अन्य संपत्तियों की जानकारी छिपाने पर हो सकती है कार्रवाई, 16 जून से शुरू होगा पहला चरण
रोशन ठाकुर
कुल्लू। प्रदेश में जनगणना-2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक होने वाले प्रथम चरण के दौरान घर-घर जाकर आंकड़े जुटाए जाएंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जानबूझकर गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने पर कार्रवाई हो सकती है। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा-11 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को इन दिनों प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें अधिनियम के प्रावधानों, आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया और गोपनीयता संबंधी नियमों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी को सार्वजनिक करना भी कानूनन अपराध है और ऐसा करने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जनगणना प्रक्रिया में प्रगणक घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन के आधार पर आंकड़े दर्ज करेंगे। मकान, कमरों की संख्या, वाहनों और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाएगा ताकि आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। यदि किसी क्षेत्र में आंकड़ों में असामान्य अंतर या अनियमितता पाई जाती है तो पुनः सत्यापन भी कराया जा सकता है।
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परिवार और दंपती संबंधी जानकारी भी होगी दर्ज
जनगणना प्रपत्र में परिवार की संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार परिवार में दंपती की संख्या पत्नी की संख्या के आधार पर दर्ज की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति की एक से अधिक पत्नियां हैं तो प्रत्येक पत्नी के साथ अलग दंपती के रूप में गणना की जाएगी। वहीं, परिवार का मुखिया वही माना जाएगा, जिसे परिवार के सदस्य अपना मुखिया घोषित करेंगे। इसके लिए परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य का मुखिया होना आवश्यक नहीं है।
जानकारी छिपाने की जरूरत नहीं : प्रशासन
उपमंडलाधिकारी बंजार पंकज शर्मा ने कहा कि जनगणना का उद्देश्य देश की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का आकलन करना है। इसलिए लोगों को अपनी चल-अचल संपत्ति या अन्य जानकारी छिपाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान सही और पूर्ण जानकारी देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
जिला सांख्यिकी विभाग के कार्यकारी अधिकारी चेत राम ने बताया कि जनगणना के आंकड़े विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण का आधार बनते हैं। इसलिए नागरिकों का सहयोग इस प्रक्रिया की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
घर, वाहन और अन्य संपत्तियों की जानकारी छिपाने पर हो सकती है कार्रवाई, 16 जून से शुरू होगा पहला चरण
रोशन ठाकुर
कुल्लू। प्रदेश में जनगणना-2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक होने वाले प्रथम चरण के दौरान घर-घर जाकर आंकड़े जुटाए जाएंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जानबूझकर गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने पर कार्रवाई हो सकती है। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा-11 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को इन दिनों प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें अधिनियम के प्रावधानों, आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया और गोपनीयता संबंधी नियमों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी को सार्वजनिक करना भी कानूनन अपराध है और ऐसा करने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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जनगणना प्रक्रिया में प्रगणक घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन के आधार पर आंकड़े दर्ज करेंगे। मकान, कमरों की संख्या, वाहनों और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाएगा ताकि आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। यदि किसी क्षेत्र में आंकड़ों में असामान्य अंतर या अनियमितता पाई जाती है तो पुनः सत्यापन भी कराया जा सकता है।
परिवार और दंपती संबंधी जानकारी भी होगी दर्ज
जनगणना प्रपत्र में परिवार की संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार परिवार में दंपती की संख्या पत्नी की संख्या के आधार पर दर्ज की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति की एक से अधिक पत्नियां हैं तो प्रत्येक पत्नी के साथ अलग दंपती के रूप में गणना की जाएगी। वहीं, परिवार का मुखिया वही माना जाएगा, जिसे परिवार के सदस्य अपना मुखिया घोषित करेंगे। इसके लिए परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य का मुखिया होना आवश्यक नहीं है।
जानकारी छिपाने की जरूरत नहीं : प्रशासन
उपमंडलाधिकारी बंजार पंकज शर्मा ने कहा कि जनगणना का उद्देश्य देश की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का आकलन करना है। इसलिए लोगों को अपनी चल-अचल संपत्ति या अन्य जानकारी छिपाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान सही और पूर्ण जानकारी देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
जिला सांख्यिकी विभाग के कार्यकारी अधिकारी चेत राम ने बताया कि जनगणना के आंकड़े विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण का आधार बनते हैं। इसलिए नागरिकों का सहयोग इस प्रक्रिया की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।