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Kullu News: रूमसू में 17 साल बाद गूंजा देव जयघोष
Thu, 20 Aug 2026 05:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 20 Aug 2026 05:45 AM IST
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कुल्लू जिला के ऊझी घाटी में रूमसू काहिका उत्सव के दौरान देव परंपरा का निर्वहन करते देवलू।-संवाद
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नग्गर (कुल्लू)। उझी घाटी के रूमसू गांव में 17 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद आयोजित ऐतिहासिक काहिका उत्सव का बुधवार को देव परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच विधिवत समापन हुआ।
काहिका के अंतिम दिन रूमसू में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। शाम को काहिका के प्रमुख देव विधान में नड़ को मूर्छित करने की परंपरा पूरी की गई। देव परंपरा के अनुसार नड़ नंत राम के मूर्छित होकर पुनः जीवित होने का विधान संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा रूमसू देव जयघोष से गूंज उठा।
17 से 19 अगस्त तक चले इस धार्मिक आयोजन से पूरी उझी घाटी देवमय बनी रही। देवता शुभ नारायण के आदेश पर आयोजित काहिका को लेकर ग्रामीणों, देव समाज और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा। प्राचीन देव परंपरा के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु रूमसू पहुंचे।
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तीन दिन रूमसू में विराजमान रहीं माता त्रिपुरा सुंदरी
रूमसू काहिका में नग्गर की अधिष्ठात्री माता त्रिपुरा सुंदरी की भूमिका विशेष रही। देव परंपरा के अनुसार माता त्रिपुरा सुंदरी अपने रथ सहित तीन दिन तक रूमसू में विराजमान रहीं। माता की उपस्थिति से काहिका के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व में और वृद्धि हुई।
माता त्रिपुरा सुंदरी के कारदार जोगिंद्र आचार्य ने बताया कि काहिका में माता की उपस्थिति का विशेष महत्व है। उनके अनुसार माता की मौजूदगी के बिना यह देव आयोजन पूर्ण नहीं माना जाता। सोमवार को नग्गर के मशाड़ा गांव स्थित माता कैलाशनी मंदिर से माता त्रिपुरा सुंदरी काहिका में शामिल होने के लिए रूमसू रवाना हुई थीं।
देवता के आदेश पर आयोजन
देवता शुभ नारायण के कारदार परमिंद्र सिंह ने बताया कि देवता के आदेश पर 17 वर्ष के अंतराल के बाद रूमसू में काहिका का आयोजन किया गया। काहिका हिमाचल की प्राचीन देव संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। देव आशीर्वाद प्राप्त करने और ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रूमसू पहुंचे।
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काहिका के अंतिम दिन रूमसू में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। शाम को काहिका के प्रमुख देव विधान में नड़ को मूर्छित करने की परंपरा पूरी की गई। देव परंपरा के अनुसार नड़ नंत राम के मूर्छित होकर पुनः जीवित होने का विधान संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा रूमसू देव जयघोष से गूंज उठा।
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17 से 19 अगस्त तक चले इस धार्मिक आयोजन से पूरी उझी घाटी देवमय बनी रही। देवता शुभ नारायण के आदेश पर आयोजित काहिका को लेकर ग्रामीणों, देव समाज और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा। प्राचीन देव परंपरा के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु रूमसू पहुंचे।
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तीन दिन रूमसू में विराजमान रहीं माता त्रिपुरा सुंदरी
रूमसू काहिका में नग्गर की अधिष्ठात्री माता त्रिपुरा सुंदरी की भूमिका विशेष रही। देव परंपरा के अनुसार माता त्रिपुरा सुंदरी अपने रथ सहित तीन दिन तक रूमसू में विराजमान रहीं। माता की उपस्थिति से काहिका के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व में और वृद्धि हुई।
माता त्रिपुरा सुंदरी के कारदार जोगिंद्र आचार्य ने बताया कि काहिका में माता की उपस्थिति का विशेष महत्व है। उनके अनुसार माता की मौजूदगी के बिना यह देव आयोजन पूर्ण नहीं माना जाता। सोमवार को नग्गर के मशाड़ा गांव स्थित माता कैलाशनी मंदिर से माता त्रिपुरा सुंदरी काहिका में शामिल होने के लिए रूमसू रवाना हुई थीं।
देवता के आदेश पर आयोजन
देवता शुभ नारायण के कारदार परमिंद्र सिंह ने बताया कि देवता के आदेश पर 17 वर्ष के अंतराल के बाद रूमसू में काहिका का आयोजन किया गया। काहिका हिमाचल की प्राचीन देव संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। देव आशीर्वाद प्राप्त करने और ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रूमसू पहुंचे।