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Kullu News: शिल्ली में शिक्षा सत्र शुरू, सरकार ने नहीं भेजे गुरु
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गुशैणी (कुल्लू)। तीर्थन घाटी के हाई स्कूल शिल्ली में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है लेकिन सरकार और विभाग ने पुरानी व्यवस्था को नहीं बदला है। विद्यालय में पांच कक्षाओं के लिए मात्र तीन ही अध्यापक तैनात है। नए अध्यापकों की तैनाती नहीं हो पाई है। यही नहीं इन कक्षाओं के करीब 60 विद्यार्थियों को दो ही कमरे उपलब्ध हैं। साथ ही इन कमरों में प्रशासनिक कार्य भी किया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थी शिक्षा के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर चिंतित हैं। नई किताबों और कापियों के साथ स्कूल तो पहुंचे लेकिन पढ़ाने के लिए अध्यापक ही नहीं हैं। अब विद्यार्थियों को गांव का स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूल में दाखिला लेने को विवश होना पड़ रहा है।
विद्यालय में केवल तीन शिक्षक ही कार्यरत हैं। इनमें एक मुख्य अध्यापक, एक टीजीटी आर्ट्स और एक टीजीटी हिंदी शामिल हैं। टीजीटी मेडिकल, टीजीटी नॉन-मेडिकल, शास्त्री, पीईटी शिक्षक, कला अध्यापक के अलावा स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद भी रिक्त है।
स्थानीय ग्रामीण मोहर सिंह ठाकुर, सरणु राम, भीमसेन, भागचंद, गोविंद सिंह, रंजीत सिंह, योगराज, एसएमसी प्रधान दिलीप सिंह, कांता देवी आदि ने कहा कि स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। यहां पांच कक्षाओं के लिए मात्र दो ही कमरे उपलब्ध हैं। इनमें बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ कार्यालय का कार्य भी किया जाता है।
ऐसे में छात्रों को बैठने और पढ़ने में काफी परेशानी होती है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब कई अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने का निर्णय ले रहे हैं।
शिक्षा उप निदेशक उच्च देशराज डोगरा ने कहा कि जिन स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद हैं, इन्हें भरने के लिए सरकार को समय-समय पर अवगत करवाया जाता है। आदेश होते ही शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
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विद्यालय में केवल तीन शिक्षक ही कार्यरत हैं। इनमें एक मुख्य अध्यापक, एक टीजीटी आर्ट्स और एक टीजीटी हिंदी शामिल हैं। टीजीटी मेडिकल, टीजीटी नॉन-मेडिकल, शास्त्री, पीईटी शिक्षक, कला अध्यापक के अलावा स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद भी रिक्त है।
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स्थानीय ग्रामीण मोहर सिंह ठाकुर, सरणु राम, भीमसेन, भागचंद, गोविंद सिंह, रंजीत सिंह, योगराज, एसएमसी प्रधान दिलीप सिंह, कांता देवी आदि ने कहा कि स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। यहां पांच कक्षाओं के लिए मात्र दो ही कमरे उपलब्ध हैं। इनमें बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ कार्यालय का कार्य भी किया जाता है।
ऐसे में छात्रों को बैठने और पढ़ने में काफी परेशानी होती है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब कई अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने का निर्णय ले रहे हैं।
शिक्षा उप निदेशक उच्च देशराज डोगरा ने कहा कि जिन स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद हैं, इन्हें भरने के लिए सरकार को समय-समय पर अवगत करवाया जाता है। आदेश होते ही शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
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