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Kullu News: मई में दिसंबर का एहसास, पहननी पड़ रहीं जैकेट
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कुल्लू। जिला कुल्लू और लाहौल-स्पीति में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। दो दिन धूप के बाद फिर बादल छा गए हैं। इससे किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर सेब उत्पादकों को ओलावृष्टि का डर सता रहा है। अप्रैल में फ्लावरिंग के दौरान खराब मौसम से बागवानों को पहले ही नुकसान उठाना पड़ा है।
रविवार को एक बार फिर मौसम ने करवट ली। लाहौल की ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात हुआ, जबकि कुल्लू में दिनभर बादल छाए रहे। ऊपरी क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी से तापमान में गिरावट आई है। मई के पहले सप्ताह में जहां मैदानी इलाके गर्मी से तप रहे हैं, वहीं कुल्लू-मनाली में दिसंबर जैसी ठंड का अहसास हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अब भी स्वेटर और जैकेट पहनने को मजबूर हैं।
पार्वती घाटी के बुजुर्ग किशन लाल ठाकुर और पूर्ण चंद का कहना है कि सर्दियों में अपेक्षा से कम बर्फबारी और बारिश हुई, जिसका असर गर्मियों में दिख सकता है। उन्होंने चेताया कि मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच ओलावृष्टि किसानों और बागवानों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। हाल ही में जिले के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान भी हुआ है। मौसम साफ होने पर ही किसानों और बागवानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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रविवार को एक बार फिर मौसम ने करवट ली। लाहौल की ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात हुआ, जबकि कुल्लू में दिनभर बादल छाए रहे। ऊपरी क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी से तापमान में गिरावट आई है। मई के पहले सप्ताह में जहां मैदानी इलाके गर्मी से तप रहे हैं, वहीं कुल्लू-मनाली में दिसंबर जैसी ठंड का अहसास हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अब भी स्वेटर और जैकेट पहनने को मजबूर हैं।
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पार्वती घाटी के बुजुर्ग किशन लाल ठाकुर और पूर्ण चंद का कहना है कि सर्दियों में अपेक्षा से कम बर्फबारी और बारिश हुई, जिसका असर गर्मियों में दिख सकता है। उन्होंने चेताया कि मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच ओलावृष्टि किसानों और बागवानों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। हाल ही में जिले के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान भी हुआ है। मौसम साफ होने पर ही किसानों और बागवानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
