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चिनाब-ब्यास संपर्क टनल के प्रभावों का हो अध्ययन :गौतम
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:06 PM IST
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कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मनाली डेवलपमेंट काउंसिल के मुख्य संरक्षक गौतम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में प्रस्तावित चिनाब–ब्यास संपर्क टनल परियोजना के पर्यावरणीय, भू-वैज्ञानिक एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का व्यापक और स्वतंत्र अध्ययन करवाने की मांग उठाई है।
यहां जारी बयान में गौतम ठाकुर ने कहा है कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश, विशेषकर कुल्लू-मनाली क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणामों वाली सिद्ध हो सकती है। हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों वाला क्षेत्र है, जहां पहले से ही भूस्खलन, बादल फटने, अतिवृष्टि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसी भी बड़ी जल संसाधन परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले उसके संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक और निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 1988, 1995, 2023 तथा 2025 में ब्यास नदी में आई भीषण बाढ़ों ने राष्ट्रीय राजमार्ग तथा अन्य आधारभूत ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिससे करोड़ों रुपये की सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति प्रभावित हुई और पर्यटन उद्योग को भी गंभीर आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मनाली डेवलपमेंट काउंसिल के मुख्य संरक्षक गौतम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में प्रस्तावित चिनाब–ब्यास संपर्क टनल परियोजना के पर्यावरणीय, भू-वैज्ञानिक एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का व्यापक और स्वतंत्र अध्ययन करवाने की मांग उठाई है।
यहां जारी बयान में गौतम ठाकुर ने कहा है कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश, विशेषकर कुल्लू-मनाली क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणामों वाली सिद्ध हो सकती है। हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों वाला क्षेत्र है, जहां पहले से ही भूस्खलन, बादल फटने, अतिवृष्टि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसी भी बड़ी जल संसाधन परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले उसके संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक और निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 1988, 1995, 2023 तथा 2025 में ब्यास नदी में आई भीषण बाढ़ों ने राष्ट्रीय राजमार्ग तथा अन्य आधारभूत ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिससे करोड़ों रुपये की सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति प्रभावित हुई और पर्यटन उद्योग को भी गंभीर आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
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