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Kullu News: कैसे मिलेगा स्वच्छ पेयजल, कब हुई सफाई, टैंकों पर तारीख नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 09 Jan 2026 11:07 PM IST
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कुल्लू के सुल्तानपुर में पानी का टैंक।-संवाद
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कुल्लू के शहरों में ही यह हाल तो ग्रामीण क्षेत्रों में कैसी होगी तस्वीर
विभाग का सफाई का दावा कागजों में, धरातल पर स्थिति कुछ और
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जल शक्ति विभाग के पास चार लाख से अधिक की आबादी को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने की जिम्मेदारी है। पेयजल स्रोतों से लेकर पेयजल भंडारण टैंकों की सफाई को लेकर विभाग रिकॉर्ड होने के दावे कर रहा हो लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ अलग है।
पेयजल टैंकों की सफाई कब की गई, इनकी तारीख ही टैंकों में दर्शाई नहीं गई है। हर टैंक पर सफाई की तारीख दर्शाना अनिवार्य है।
जिला मुख्यालय स्थित नगर परिषद क्षेत्र सुल्तानपुर जल शक्ति विभाग के टैंक में पिछली बार कब सफाई की गई और आगामी तारीख अंकित नहीं मिली। इसमें सफाई कब हुई थी, इसका विवरण नहीं मिला। साथ ही गांधीनगर क्षेत्र में जल शक्ति विभाग के टैंक की हालत ऐसी है कि इस पर पत्तों का बिछौना बिछ गया है। यहां भी टैंक की सफाई का विवरण नहीं मिला। सुल्तानपुर में लोहे के छोटे टैंक में कालिख जमी हुई मिली। कुल्लू शहर के टैंकों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था है।
जल शक्ति विभाग की मानें तो कुल्लू, मनाली, बंजार और आनी उपमंडल की कुल 900 स्कीमों में करीब 4000 टंकियां हैं। विभाग का दावा है कि पेयजल टैंकों की सफाई प्री मानसून और पोस्ट मानसून दो बार की जा रही है। हालांकि कुल्लू शहर के टैंकों की हर तीन महीने बाद सफाई की जाती है। इसका बाकायदा विभाग के पास लिखित में रिकॉर्ड भी रहता है। विभाग की ओर से इस प्रक्रिया को लगातार पूरा किया जाता है।
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पानी की टंकियों की सफाई मानसून के पहले और बाद में की जाती है। अब सरकार की ओर से कुछ नए निर्देश जारी हुए हैं जो अभी तक नहीं मिले हैं। - विनोद ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग
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पेयजल टैंकों की सफाई को लेकर जल शक्ति विभाग को गंभीर होने की जरूरत है। दो बार सफाई करने के बाद बावजूद समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए। जल से लोगों का स्वास्थ्य जुड़ा है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल मिलना लोगों का अधिकार है। - नरोत्तम श्लाठ, कुल्लू
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पेयजल टैंकों की सफाई उचित तरीके से और समयबद्ध होनी चाहिए। इसमें अगर कोई कोताही करते हैं तो उनकी जबावदेही भी तय की जानी चाहिए। स्वच्छ पेयजल न मिलने का खामियाजा लोगों को महंगा पड़ सकता है। इस ओर विभाग ध्यान दें। - इंद्र सिंह, कुल्लू
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विभाग का सफाई का दावा कागजों में, धरातल पर स्थिति कुछ और
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जल शक्ति विभाग के पास चार लाख से अधिक की आबादी को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने की जिम्मेदारी है। पेयजल स्रोतों से लेकर पेयजल भंडारण टैंकों की सफाई को लेकर विभाग रिकॉर्ड होने के दावे कर रहा हो लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ अलग है।
पेयजल टैंकों की सफाई कब की गई, इनकी तारीख ही टैंकों में दर्शाई नहीं गई है। हर टैंक पर सफाई की तारीख दर्शाना अनिवार्य है।
जिला मुख्यालय स्थित नगर परिषद क्षेत्र सुल्तानपुर जल शक्ति विभाग के टैंक में पिछली बार कब सफाई की गई और आगामी तारीख अंकित नहीं मिली। इसमें सफाई कब हुई थी, इसका विवरण नहीं मिला। साथ ही गांधीनगर क्षेत्र में जल शक्ति विभाग के टैंक की हालत ऐसी है कि इस पर पत्तों का बिछौना बिछ गया है। यहां भी टैंक की सफाई का विवरण नहीं मिला। सुल्तानपुर में लोहे के छोटे टैंक में कालिख जमी हुई मिली। कुल्लू शहर के टैंकों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था है।
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जल शक्ति विभाग की मानें तो कुल्लू, मनाली, बंजार और आनी उपमंडल की कुल 900 स्कीमों में करीब 4000 टंकियां हैं। विभाग का दावा है कि पेयजल टैंकों की सफाई प्री मानसून और पोस्ट मानसून दो बार की जा रही है। हालांकि कुल्लू शहर के टैंकों की हर तीन महीने बाद सफाई की जाती है। इसका बाकायदा विभाग के पास लिखित में रिकॉर्ड भी रहता है। विभाग की ओर से इस प्रक्रिया को लगातार पूरा किया जाता है।
पानी की टंकियों की सफाई मानसून के पहले और बाद में की जाती है। अब सरकार की ओर से कुछ नए निर्देश जारी हुए हैं जो अभी तक नहीं मिले हैं। - विनोद ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग
पेयजल टैंकों की सफाई को लेकर जल शक्ति विभाग को गंभीर होने की जरूरत है। दो बार सफाई करने के बाद बावजूद समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए। जल से लोगों का स्वास्थ्य जुड़ा है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल मिलना लोगों का अधिकार है। - नरोत्तम श्लाठ, कुल्लू
पेयजल टैंकों की सफाई उचित तरीके से और समयबद्ध होनी चाहिए। इसमें अगर कोई कोताही करते हैं तो उनकी जबावदेही भी तय की जानी चाहिए। स्वच्छ पेयजल न मिलने का खामियाजा लोगों को महंगा पड़ सकता है। इस ओर विभाग ध्यान दें। - इंद्र सिंह, कुल्लू