{"_id":"6a60c2856f1e3b093d044aca","slug":"kahika-festival-begins-in-kashamti-after-44-years-kullu-news-c-89-1-klu1002-182163-2026-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: कशामटी में 44 साल बाद शुरू हुआ काहिका पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: कशामटी में 44 साल बाद शुरू हुआ काहिका पर्व
Thu, 23 Jul 2026 06:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 23 Jul 2026 06:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुल्लू। सावन मास के पावन अवसर पर लगघाटी के कशामटी गांव में देवी परमेश्वरी महायोगिनी मां नौंउणी का ऐतिहासिक काहिका पर्व बुधवार को विधिवत शुरू हो गया।
मां नौंउणी के पुजारी हरि सिंह ठाकुर ने बताया कि 44 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस देव कारज केलिए क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। इससे पहले यह पर्व वर्ष 1982 में मनाया गया था। तीन दिवसीय काहिका पर्व 24 जुलाई तक चलेगा।
परंपरा के अनुसार देव पंचाली नारायण इस देव कारज का संचालन कर रहे हैं, जबकि देव गोहरी भी इस आयोजन में शामिल हैं। काहिका की विशेषता यह है कि इसमें देवरथ शामिल नहीं होते और केवल देव निशान के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
बुधवार को बडोर स्थापना और विभिन्न देवताओं को आहुतियां देने की रस्मों के साथ पर्व का शुभारंभ हुआ। 23 जुलाई को नरमेध यज्ञ तथा 24 जुलाई को हार तलांग की रस्म अदा की जाएगी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
मां नौंउणी के पुजारी हरि सिंह ठाकुर ने बताया कि 44 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस देव कारज केलिए क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। इससे पहले यह पर्व वर्ष 1982 में मनाया गया था। तीन दिवसीय काहिका पर्व 24 जुलाई तक चलेगा।
परंपरा के अनुसार देव पंचाली नारायण इस देव कारज का संचालन कर रहे हैं, जबकि देव गोहरी भी इस आयोजन में शामिल हैं। काहिका की विशेषता यह है कि इसमें देवरथ शामिल नहीं होते और केवल देव निशान के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
विज्ञापन
बुधवार को बडोर स्थापना और विभिन्न देवताओं को आहुतियां देने की रस्मों के साथ पर्व का शुभारंभ हुआ। 23 जुलाई को नरमेध यज्ञ तथा 24 जुलाई को हार तलांग की रस्म अदा की जाएगी। संवाद
विज्ञापन