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Explainer: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदक क्यों घट सकते हैं? 2022 में जीते थे 61 मेडल, इस बार 30 मुश्किल
Thu, 23 Jul 2026 01:57 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लोस्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लोस्गो
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 23 Jul 2026 01:57 PM IST
सार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 2022 जैसा पदक प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह खेलों की संख्या 19 से घटकर 10 होना है। कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट जैसे भारत के मजबूत खेल बाहर हैं। हालांकि नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, लवलीना और एथलेटिक्स टीम से अब भी बड़ी उम्मीदें हैं।
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026
- फोटो : ANI
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विस्तार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 2022 जैसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा। इस बार खेलों की संख्या 19 से घटाकर 10 कर दी गई है, जिससे भारत के कई मजबूत खेल बाहर हो गए हैं। ऐसे में पदकों की संख्या घट सकती है, हालांकि एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग से अब भी बड़ी उम्मीदें हैं।
23 जुलाई से शुरू हो रहे हैं कॉमनवेल्थ गेम्स
फुटबॉल विश्व कप खत्म होते ही अब खेल प्रेमियों की नजरें स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर हैं। 23 जुलाई से 2 अगस्त तक चलने वाले इन खेलों में भारत के 125 से अधिक खिलाड़ी और पैरा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। पिछली बार बर्मिंघम 2022 में भारत ने 61 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी भारत वैसा ही प्रदर्शन दोहरा पाएगा? इसका जवाब आसान नहीं है।
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23 जुलाई से शुरू हो रहे हैं कॉमनवेल्थ गेम्स
फुटबॉल विश्व कप खत्म होते ही अब खेल प्रेमियों की नजरें स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर हैं। 23 जुलाई से 2 अगस्त तक चलने वाले इन खेलों में भारत के 125 से अधिक खिलाड़ी और पैरा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। पिछली बार बर्मिंघम 2022 में भारत ने 61 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी भारत वैसा ही प्रदर्शन दोहरा पाएगा? इसका जवाब आसान नहीं है।
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सवाल: भारत ने कॉमनवेल्थ में कुल कितने पदक जीते?
2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 61 पदक अपने नाम किए थे। इनमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल थे। इसके साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के कुल पदकों की संख्या 564 हो गई, जिसमें 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य पदक शामिल हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत का प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत का प्रदर्शन (खेलवार)
सवाल: आखिर इस बार भारत के पदक कम होने की आशंका क्यों जताई जा रही है?
सबसे बड़ी वजह है खेलों की संख्या में भारी कटौती। बर्मिंघम 2022 में 19 खेल शामिल थे, जबकि ग्लास्गो 2026 में केवल 10 खेल होंगे। यानी नौ खेलों को इस बार कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है। इनमें बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी, क्रिकेट, टेबल टेनिस, स्क्वैश, ट्रायथलॉन, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन्स जैसे खेल शामिल हैं। यही वे खेल हैं, जिनमें भारत हर बार बड़ी संख्या में पदक जीतता रहा है।
2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 61 पदक अपने नाम किए थे। इनमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल थे। इसके साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के कुल पदकों की संख्या 564 हो गई, जिसमें 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य पदक शामिल हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत का प्रदर्शन
| पदक | संख्या |
|---|---|
| स्वर्ण | 22 |
| रजत | 16 |
| कांस्य | 23 |
| कुल पदक | 61 |
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत का प्रदर्शन (खेलवार)
| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल पदक |
|---|---|---|---|---|
| कुश्ती | 6 | 1 | 5 | 12 |
| भारोत्तोलन | 3 | 3 | 4 | 10 |
| एथलेटिक्स | 1 | 4 | 3 | 8 |
| मुक्केबाजी | 3 | 1 | 3 | 7 |
| बैडमिंटन | 3 | 1 | 2 | 6 |
| टेबल टेनिस | 3 | 1 | 1 | 5 |
| जूडो | 0 | 2 | 1 | 3 |
| लॉन बॉल्स | 1 | 1 | 0 | 2 |
| पैरा टेबल टेनिस | 1 | 0 | 1 | 2 |
| स्क्वैश | 0 | 0 | 2 | 2 |
| हॉकी | 0 | 1 | 1 | 2 |
| पैरा पावरलिफ्टिंग | 1 | 0 | 0 | 1 |
| क्रिकेट | 0 | 1 | 0 | 1 |
सवाल: आखिर इस बार भारत के पदक कम होने की आशंका क्यों जताई जा रही है?
सबसे बड़ी वजह है खेलों की संख्या में भारी कटौती। बर्मिंघम 2022 में 19 खेल शामिल थे, जबकि ग्लास्गो 2026 में केवल 10 खेल होंगे। यानी नौ खेलों को इस बार कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है। इनमें बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी, क्रिकेट, टेबल टेनिस, स्क्वैश, ट्रायथलॉन, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन्स जैसे खेल शामिल हैं। यही वे खेल हैं, जिनमें भारत हर बार बड़ी संख्या में पदक जीतता रहा है।
सवाल: आखिर इतने सारे खेल हटाए क्यों गए?
सवाल: भारत को इसका सबसे ज्यादा नुकसान किस तरह होगा?
भारत के लिए सबसे बड़ा झटका उन खेलों के बाहर होने से लगा है, जिनमें वह लगातार पदक जीतता रहा है। बर्मिंघम 2022 में भारत के 61 पदकों में से-
यानी सिर्फ इन पांच खेलों से भारत ने 28 पदक जीते थे। अगर शूटिंग को भी जोड़ लें, जो 2022 में नहीं थी लेकिन भारत का सबसे सफल कॉमनवेल्थ खेल रहा है, तो तस्वीर और साफ हो जाती है। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में शूटिंग में सबसे ज्यादा 135 पदक जीते हैं। यही वजह है कि इस बार भारत का कुल पदक आंकड़ा काफी कम रहने की संभावना जताई जा रही है।
- इसकी वजह आर्थिक संकट है। दरअसल, 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को मिली थी। लेकिन आयोजन की लागत 6-7 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुंचने लगी। बढ़ते खर्च के कारण विक्टोरिया सरकार ने 2023 में मेजबानी छोड़ दी। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन पर ही संकट खड़ा हो गया।
- तब स्कॉटलैंड के ग्लास्गो ने कम समय में आयोजन की जिम्मेदारी ली, लेकिन साफ कहा कि वह सीमित बजट में ही गेम्स करा सकेगा। इसी वजह से खेलों की संख्या घटाकर 10 कर दी गई और पूरा आयोजन सिर्फ चार मौजूदा स्टेडियमों में रखा गया। इस बार खिलाड़ियों के लिए अलग एथलीट्स विलेज भी नहीं बनाया गया है। सभी खिलाड़ी होटल में ठहरेंगे, जबकि उद्घाटन और समापन समारोह भी पहले के मुकाबले छोटे होंगे।
सवाल: भारत को इसका सबसे ज्यादा नुकसान किस तरह होगा?
भारत के लिए सबसे बड़ा झटका उन खेलों के बाहर होने से लगा है, जिनमें वह लगातार पदक जीतता रहा है। बर्मिंघम 2022 में भारत के 61 पदकों में से-
- कुश्ती से 12 पदक
- टेबल टेनिस से सात पदक
- बैडमिंटन से छह पदक
- हॉकी से दो पदक
- क्रिकेट से एक पदक
यानी सिर्फ इन पांच खेलों से भारत ने 28 पदक जीते थे। अगर शूटिंग को भी जोड़ लें, जो 2022 में नहीं थी लेकिन भारत का सबसे सफल कॉमनवेल्थ खेल रहा है, तो तस्वीर और साफ हो जाती है। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में शूटिंग में सबसे ज्यादा 135 पदक जीते हैं। यही वजह है कि इस बार भारत का कुल पदक आंकड़ा काफी कम रहने की संभावना जताई जा रही है।
सवाल: क्या भारत के लिए सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं?
बिल्कुल नहीं। भले ही कई मजबूत खेल बाहर हो गए हों, लेकिन भारत अब भी कई स्पर्धाओं में मजबूत दावेदार है। सबसे ज्यादा उम्मीद एथलेटिक्स से है। भारत 32 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम के साथ उतर रहा है। ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो में गोल्ड के सबसे बड़े दावेदार हैं। हालांकि उन्हें पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम, श्रीलंका के रुमेश थरंगा और ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स जैसी चुनौती का सामना करना होगा। इसके अलावा मुरली श्रीशंकर (लॉन्ग जंप), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन), सर्वेश कुशारे (हाई जंप), प्रवीण चित्रावेल (ट्रिपल जंप) और परुल चौधरी से भी पदक की उम्मीद है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के पदक (बर्मिंघम 2022 तक)
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का कुल प्रदर्शन (बर्मिंघम 2022 तक)
बिल्कुल नहीं। भले ही कई मजबूत खेल बाहर हो गए हों, लेकिन भारत अब भी कई स्पर्धाओं में मजबूत दावेदार है। सबसे ज्यादा उम्मीद एथलेटिक्स से है। भारत 32 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम के साथ उतर रहा है। ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो में गोल्ड के सबसे बड़े दावेदार हैं। हालांकि उन्हें पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम, श्रीलंका के रुमेश थरंगा और ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स जैसी चुनौती का सामना करना होगा। इसके अलावा मुरली श्रीशंकर (लॉन्ग जंप), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन), सर्वेश कुशारे (हाई जंप), प्रवीण चित्रावेल (ट्रिपल जंप) और परुल चौधरी से भी पदक की उम्मीद है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के पदक (बर्मिंघम 2022 तक)
| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल पदक |
|---|---|---|---|---|
| निशानेबाजी | 63 | 44 | 28 | 135 |
| भारोत्तोलन | 46 | 51 | 36 | 133 |
| कुश्ती | 49 | 39 | 26 | 114 |
| मुक्केबाजी | 11 | 13 | 20 | 44 |
| एथलेटिक्स | 6 | 14 | 16 | 36 |
| बैडमिंटन | 10 | 8 | 13 | 31 |
| टेबल टेनिस | 10 | 5 | 13 | 28 |
| जूडो | 0 | 5 | 6 | 11 |
| तीरंदाजी | 3 | 1 | 4 | 8 |
| हॉकी | 1 | 4 | 1 | 6 |
| स्क्वैश | 1 | 2 | 2 | 5 |
| टेनिस | 1 | 1 | 2 | 4 |
| पावरलिफ्टिंग | 1 | 1 | 2 | 4 |
| जिम्नास्टिक्स | 0 | 1 | 2 | 3 |
| लॉन बॉल्स | 1 | 1 | 0 | 2 |
| क्रिकेट | 0 | 1 | 0 | 1 |
| तैराकी | 0 | 0 | 1 | 1 |
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का कुल प्रदर्शन (बर्मिंघम 2022 तक)
| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| कुल स्वर्ण | 203 |
| कुल रजत | 190 |
| कुल कांस्य | 171 |
| कुल पदक | 564 |
| ओवरऑल रैंक | चौथा |
सवाल: एथलेटिक्स के अलावा किन खेलों से उम्मीदें हैं?
वेटलिफ्टिंग भारत के लिए फिर बड़ा पदक स्रोत बन सकती है। टोक्यो ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू गोल्ड की सबसे बड़ी दावेदार हैं। उनके अलावा बिंदियारानी देवी, ज्ञानेश्वरी देवी और अजय बाबू जैसे खिलाड़ी भी पोडियम पर पहुंच सकते हैं। बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन, विश्व चैंपियन जैसमीन लैंबोरिया और सचिन सिवाच भारत की उम्मीदें बढ़ाएंगे। जूडो में तुलिका मान, अस्मिता डे, इनुंगनबी और इशरूप नारंग से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, लॉन बॉल्स में भारत 2022 के ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेगा। पिछली बार भारत ने इस खेल में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था।
वेटलिफ्टिंग भारत के लिए फिर बड़ा पदक स्रोत बन सकती है। टोक्यो ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू गोल्ड की सबसे बड़ी दावेदार हैं। उनके अलावा बिंदियारानी देवी, ज्ञानेश्वरी देवी और अजय बाबू जैसे खिलाड़ी भी पोडियम पर पहुंच सकते हैं। बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन, विश्व चैंपियन जैसमीन लैंबोरिया और सचिन सिवाच भारत की उम्मीदें बढ़ाएंगे। जूडो में तुलिका मान, अस्मिता डे, इनुंगनबी और इशरूप नारंग से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, लॉन बॉल्स में भारत 2022 के ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेगा। पिछली बार भारत ने इस खेल में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था।
सवाल: भारत कितने पदक जीत सकता है?
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि भारत इस बार करीब 30 पदक जीत सकता है। यह संख्या 2022 के 61 पदकों से लगभग आधी होगी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों और कम खेलों को देखते हुए इसे खराब प्रदर्शन नहीं माना जाएगा।
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि भारत इस बार करीब 30 पदक जीत सकता है। यह संख्या 2022 के 61 पदकों से लगभग आधी होगी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों और कम खेलों को देखते हुए इसे खराब प्रदर्शन नहीं माना जाएगा।
क्या कहते हैं पूर्व खिलाड़ी?
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान वीरेन रस्किन्हा का मानना है कि कई पदक दिलाने वाले खेलों के बाहर होने का सीधा असर भारत के प्रदर्शन पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स बिल्कुल अलग होंगे। हमारे कई ऐसे खेल इसमें नहीं हैं, जिनमें भारत लगातार पदक जीतता रहा है। इसका असर हमारे कुल पदक तालिका पर जरूर पड़ेगा।'
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए आसान नहीं होने वाले हैं। खेलों की संख्या कम होने से पदकों की बारिश की उम्मीद करना मुश्किल है। हालांकि एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो और लॉन बॉल्स जैसे खेलों में भारत के पास अब भी मजबूत दावेदार मौजूद हैं। ऐसे में यदि भारतीय खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर उतरते हैं तो कम खेलों के बावजूद देश सम्मानजनक पदक संख्या के साथ ग्लास्गो से लौट सकता है।
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान वीरेन रस्किन्हा का मानना है कि कई पदक दिलाने वाले खेलों के बाहर होने का सीधा असर भारत के प्रदर्शन पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स बिल्कुल अलग होंगे। हमारे कई ऐसे खेल इसमें नहीं हैं, जिनमें भारत लगातार पदक जीतता रहा है। इसका असर हमारे कुल पदक तालिका पर जरूर पड़ेगा।'
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए आसान नहीं होने वाले हैं। खेलों की संख्या कम होने से पदकों की बारिश की उम्मीद करना मुश्किल है। हालांकि एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो और लॉन बॉल्स जैसे खेलों में भारत के पास अब भी मजबूत दावेदार मौजूद हैं। ऐसे में यदि भारतीय खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर उतरते हैं तो कम खेलों के बावजूद देश सम्मानजनक पदक संख्या के साथ ग्लास्गो से लौट सकता है।