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Kullu News: खेतों से नमी, आंखों में पानी सूखा, पीली पड़ गईं फसलें
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:10 PM IST
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खराहल घाटी के सेउगी में बिना बारिश के पीली पड़ी जौ की फसल। संवाद
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कुल्लू में सूखे जैसे हालात के बीच रबी की फसलों पर मंडराए संकट के बादल
बारिश न होने से गेहूं कि बिजाई भी नहीं कर पाए जिले के किसान
पानी के अभाव में पीली पड़ने लगी जौ और लहसुन की फसलें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। चार महीने से सूखे जैसे हालात के बीच खेतों में फसलें पीली पड़ने लगी हैं। सैकड़ाें किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर सके हैं। जिन किसानों ने जौ, लहसुन की बिजाई की है।
ये फसलें भी अब बारिश के बिना पीली पड़ने लगी हैं। सूखे जैसे हालात के बीच रबी फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बारिश न होने से मायूस किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
जिले में करीब 14,000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार होती है। 1600 हेक्टेयर में जौ के साथ ही 1500 हेक्टेयर में मटर और 1500 हेक्टेयर में लहसुन की पैदावार होती है। 80 फीसदी किसान अभी तक गेहूं की पैदावार नहीं कर पाए हैं। जौ की फसल बारिश के बिना पीली पड़ रही है। इस बार मौसम की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ी है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में आई बारिश के बाद अभी खुलकर बादल नहीं बरसे हैं। इसके चलते अधिकतर किसान रबी फसल गेहूं, मटर आदि की बिजाई नहीं कर सके हैं। बारिश न होने से रबी फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उधर, कृषि उपनिदेशक कुल्लू ऋतु गुप्ता ने कहा कि बारिश का इंतजार है। इससे किसानों को राहत मिलेगी।
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नवंबर और दिसंबर में बारिश नहीं हुई। खेतों में नमी न के बराबर होने से किसान गेहूं आदि की बिजाई नहीं कर सके हैं। किसानों को आस थी कि जनवरी में बारिश होगी। जनवरी का आधा पखवाड़ा बीत गया है। अभी तक किसानों की उम्मीद पूरी नहीं हुई है। -सुनील राणा, अध्यक्ष, फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन कुल्लू
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नगदी फसलों और गेहूं पर ही किसानों की आर्थिकी होती है। अगर किसान फसल समय पर नहीं बीजेंगे तो इसके उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा। अगर जनवरी के दूसरे पखवाड़े में भी अगर फसल बुआई में और देरी होती है को इसका नुकसान किसान को उठाना पड़ेगा। -जीत राम शर्मा, बंजार, कुल्लू
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देवी-देवताओं के पास भी लगा रहे अरदास
जिला कुल्लू में देवी-देवताओं के पास भी बारिश के लिए गुहार लगाई जा रही है। धार्मिक आयोजनों में देवताओं के पास बारिश के लिए गूर के माध्यम से पूछ डाली जा रही है। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर का कहना है कि देवी-देवताओं से बारिश की गुहार लगाई जा रही है।
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बारिश न होने से गेहूं कि बिजाई भी नहीं कर पाए जिले के किसान
पानी के अभाव में पीली पड़ने लगी जौ और लहसुन की फसलें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। चार महीने से सूखे जैसे हालात के बीच खेतों में फसलें पीली पड़ने लगी हैं। सैकड़ाें किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर सके हैं। जिन किसानों ने जौ, लहसुन की बिजाई की है।
ये फसलें भी अब बारिश के बिना पीली पड़ने लगी हैं। सूखे जैसे हालात के बीच रबी फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बारिश न होने से मायूस किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
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जिले में करीब 14,000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार होती है। 1600 हेक्टेयर में जौ के साथ ही 1500 हेक्टेयर में मटर और 1500 हेक्टेयर में लहसुन की पैदावार होती है। 80 फीसदी किसान अभी तक गेहूं की पैदावार नहीं कर पाए हैं। जौ की फसल बारिश के बिना पीली पड़ रही है। इस बार मौसम की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ी है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में आई बारिश के बाद अभी खुलकर बादल नहीं बरसे हैं। इसके चलते अधिकतर किसान रबी फसल गेहूं, मटर आदि की बिजाई नहीं कर सके हैं। बारिश न होने से रबी फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उधर, कृषि उपनिदेशक कुल्लू ऋतु गुप्ता ने कहा कि बारिश का इंतजार है। इससे किसानों को राहत मिलेगी।
नवंबर और दिसंबर में बारिश नहीं हुई। खेतों में नमी न के बराबर होने से किसान गेहूं आदि की बिजाई नहीं कर सके हैं। किसानों को आस थी कि जनवरी में बारिश होगी। जनवरी का आधा पखवाड़ा बीत गया है। अभी तक किसानों की उम्मीद पूरी नहीं हुई है। -सुनील राणा, अध्यक्ष, फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन कुल्लू
नगदी फसलों और गेहूं पर ही किसानों की आर्थिकी होती है। अगर किसान फसल समय पर नहीं बीजेंगे तो इसके उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा। अगर जनवरी के दूसरे पखवाड़े में भी अगर फसल बुआई में और देरी होती है को इसका नुकसान किसान को उठाना पड़ेगा। -जीत राम शर्मा, बंजार, कुल्लू
देवी-देवताओं के पास भी लगा रहे अरदास
जिला कुल्लू में देवी-देवताओं के पास भी बारिश के लिए गुहार लगाई जा रही है। धार्मिक आयोजनों में देवताओं के पास बारिश के लिए गूर के माध्यम से पूछ डाली जा रही है। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर का कहना है कि देवी-देवताओं से बारिश की गुहार लगाई जा रही है।