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Kullu News: ग्रामीण रूटों पर ओवरलोड बसें दे रहीं हादसों को न्योता
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 12 Jan 2026 10:37 PM IST
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अंतरराज्यीय बस अड्डा में सवारियों से भरी बस। -संवाद
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सुबह और शाम के समय रूटों पर जाने वाली बसों में रहती है ज्यादा भीड़
नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी और प्रशिक्षुओं के अलावा मरीज करते हैं सफर
लोग बोले- ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाने से मिलेगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बसों में ओवर लोडिंग जिले में हादसों को न्योता दे रही है। बसों में रोजाना प्राइम टाइम (सुबह-शाम) में ओवर लोडिंग देखने को मिलती है। शहरों के बजाय ग्रामीण इलाकों में यह समस्या अधिक रहती है।
प्राइम टाइम में बसें सवारियों से खचाखच भरी रहती हैं। इस समय नौकरी पेशा, शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और प्रशिक्षुओं के अलावा मरीजों और आवश्यक कामकाज निपटाने शहरों का रुख करने वाले लोगों की संख्या अधिक रहती है। इस वजह से बसें ओवरलोड रहती हैं। समस्या यह है कि बसों में क्षमता से अधिक सवारियां सफर करती हैं। इसका मुख्य कारण बसों और रूटों की कमी बताई जा रही है।
गौरतलब है कि जिले में सरकारी और निजी बसों को मिलाकर 350 से अधिक बस रूट हैं। बावजूद इसके ओवरलोडिंग की समस्या बनी हुई है। बिजली महादेव, भेखली, पाहनाला, गड़सा, दियार के अलावा उपमंडल मनाली और बंजार के विभिन्न ग्रामीणों रूटों पर सरकारी और निजी बसों में ओवरलोडिंग आम बात है। सुबह के समय ग्रामीण रूटों की बसों में शहरों और शाम को गांवों की ओर बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं। ऐसे में अगर रूट पर दौड़ रही बस के साथ कोई अनहोनी होगी तो कई सवारियों की जान जा सकती है। हालांकि, विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों की जनता सरकार, प्रशासन, परिवहन विभाग और परिवहन निगम से बस रूटों में बढ़ोतरी की मांग कर रही है लेकिन रूट परमिट न मिलने से बसों की कमी बढ़ी समस्या बन रही है।
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शहरों के बजाय ग्रामीण रूटों पर बसों की समयसारिणी में कई घंटों का अंतराल रहता है। ऐसे में समय पर गंतव्य पर पहुंचने के लिए सवारियों को मजबूरन भीड़ भरी बस में सफर करना पड़ता है। सरकार और परिवहन विभाग ग्रामीण रूटों की संख्या बढ़ाएं, जितनी अधिक बसें दौड़ेंगी, उतना ही हादसों का खतरा कम होगा। -ऋतिका चौहान
-- ग्रामीण क्षेत्रों में बसें ओवरलोडिंग और शहरों में तेज रफ्तार से दाैड़ती हैं। इससे हादसे हो जाते हैं। सवारियों को चोटिल होना पड़ता है। परिवहन विभाग और परिवहन निगम नियमित अंतराल में बसों का निरीक्षण नहीं करते हैं। इस लापरवाही का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। ओवरलोडिंग को बस रूट बढ़ाकर कम किया जा सकता है। -सुभाष ठाकुर
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नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी और प्रशिक्षुओं के अलावा मरीज करते हैं सफर
लोग बोले- ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाने से मिलेगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बसों में ओवर लोडिंग जिले में हादसों को न्योता दे रही है। बसों में रोजाना प्राइम टाइम (सुबह-शाम) में ओवर लोडिंग देखने को मिलती है। शहरों के बजाय ग्रामीण इलाकों में यह समस्या अधिक रहती है।
प्राइम टाइम में बसें सवारियों से खचाखच भरी रहती हैं। इस समय नौकरी पेशा, शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और प्रशिक्षुओं के अलावा मरीजों और आवश्यक कामकाज निपटाने शहरों का रुख करने वाले लोगों की संख्या अधिक रहती है। इस वजह से बसें ओवरलोड रहती हैं। समस्या यह है कि बसों में क्षमता से अधिक सवारियां सफर करती हैं। इसका मुख्य कारण बसों और रूटों की कमी बताई जा रही है।
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गौरतलब है कि जिले में सरकारी और निजी बसों को मिलाकर 350 से अधिक बस रूट हैं। बावजूद इसके ओवरलोडिंग की समस्या बनी हुई है। बिजली महादेव, भेखली, पाहनाला, गड़सा, दियार के अलावा उपमंडल मनाली और बंजार के विभिन्न ग्रामीणों रूटों पर सरकारी और निजी बसों में ओवरलोडिंग आम बात है। सुबह के समय ग्रामीण रूटों की बसों में शहरों और शाम को गांवों की ओर बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं। ऐसे में अगर रूट पर दौड़ रही बस के साथ कोई अनहोनी होगी तो कई सवारियों की जान जा सकती है। हालांकि, विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों की जनता सरकार, प्रशासन, परिवहन विभाग और परिवहन निगम से बस रूटों में बढ़ोतरी की मांग कर रही है लेकिन रूट परमिट न मिलने से बसों की कमी बढ़ी समस्या बन रही है।
शहरों के बजाय ग्रामीण रूटों पर बसों की समयसारिणी में कई घंटों का अंतराल रहता है। ऐसे में समय पर गंतव्य पर पहुंचने के लिए सवारियों को मजबूरन भीड़ भरी बस में सफर करना पड़ता है। सरकार और परिवहन विभाग ग्रामीण रूटों की संख्या बढ़ाएं, जितनी अधिक बसें दौड़ेंगी, उतना ही हादसों का खतरा कम होगा। -ऋतिका चौहान