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Kullu News: एसडीआरएफ की टीम ने किया झील का निरीक्षण
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सैंज घाटी के जीवानाला में बनी झील के निरिक्षण के लिए रवाना हुई एसडीआरएफ की टीम।-संवाद
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न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के जीवानाला में शरण के पास पहाड़ी दरकने से बनी झील के आकार को लेकर प्रशासन भी गंभीर हो गया है। खतरे की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन ने एसडीआरएफ की टीम मौके पर भेजी है। सैंज घाटी में बरसात को लेकर तैनात किए गए एसडीआरएफ के 12 जवानों को झील के खतरे को भांपने के लिए वीरवार को झील क्षेत्र भेजा। एसडीआरएफ के जवानों ने मौके पर पहुंचकर झील के फोटो और वीडियोग्राफी की है जबकि तकनीकी रूप से खतरे को टालने की संभावनाओं को भी तलाशा है।
अमर उजाला में 22 जुलाई को भूस्खलन से बढ़ रहा झील का जलस्तर शीर्षक के माध्यम से इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया था। इसमें झील से संभावित खतरे को उठाया गया था। लिहाजा, इस पर अब प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए झील का निरीक्षण शुरू कर दिया है। वीरवार को जवानों ने क्षेत्र में पैदल पहुंंचकर झील का निरीक्षण किया। गौरतलब है कि यहां पहाड़ी से भूस्खलन होने के कारण शरण गांव के पास झील बनी है। यह 2023 में पहाड़ दरकने से बनी थी। उसके बाद हर साल इसका आकार बढ़ता जा रहा है। इस बार भी बरसात शुरू होते ही पहाड़ी से भूस्खलन होना शुरू हो गया है, ऐसे में पानी का बहाव रुक रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि एक तरफ से पानी झील से बह रहा है लेकिन काफी मात्रा में झील में मौजूद पानी से तबाही होने का लोगों को अंदेशा बना हुआ है। सैंज वैली विकास समिति के प्रधान बुधराम का कहना है कि लोगों को डर है कि इससे जीवानाला और पिन पार्वती नदी के किनारे की आबादी को खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इससे आगे नड़ाहरा विहाली, सिउंड, सोती, सैंज, बकशाहल, खराटला, तरेहड़ा, तलाड़ा, सपांगणी, बिहाली, लारजी आदि बस्ती को खतरा पैदा होगा।
रैला-दो पंचायत के प्रधान डाबे राम राणा ने बताया कि प्रशासन की ओर से एसडीआरएफ की टीम मौके पर भेजी है जो संभावित खतरे का पता लगाएगी। उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया है इसको लेकर उचित कदम उठाए जाएं।
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बंजार के उपमंडलाधिकारी पंकज शर्मा ने बताया कि झील का निरीक्षण करने के लिए टीम भेजी गई है जिससे संभावित खतरे का पता लगाया जा सके और प्रशासन समय रहते उचित कदम उठा सके।
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अमर उजाला में 22 जुलाई को भूस्खलन से बढ़ रहा झील का जलस्तर शीर्षक के माध्यम से इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया था। इसमें झील से संभावित खतरे को उठाया गया था। लिहाजा, इस पर अब प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए झील का निरीक्षण शुरू कर दिया है। वीरवार को जवानों ने क्षेत्र में पैदल पहुंंचकर झील का निरीक्षण किया। गौरतलब है कि यहां पहाड़ी से भूस्खलन होने के कारण शरण गांव के पास झील बनी है। यह 2023 में पहाड़ दरकने से बनी थी। उसके बाद हर साल इसका आकार बढ़ता जा रहा है। इस बार भी बरसात शुरू होते ही पहाड़ी से भूस्खलन होना शुरू हो गया है, ऐसे में पानी का बहाव रुक रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि एक तरफ से पानी झील से बह रहा है लेकिन काफी मात्रा में झील में मौजूद पानी से तबाही होने का लोगों को अंदेशा बना हुआ है। सैंज वैली विकास समिति के प्रधान बुधराम का कहना है कि लोगों को डर है कि इससे जीवानाला और पिन पार्वती नदी के किनारे की आबादी को खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इससे आगे नड़ाहरा विहाली, सिउंड, सोती, सैंज, बकशाहल, खराटला, तरेहड़ा, तलाड़ा, सपांगणी, बिहाली, लारजी आदि बस्ती को खतरा पैदा होगा।
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रैला-दो पंचायत के प्रधान डाबे राम राणा ने बताया कि प्रशासन की ओर से एसडीआरएफ की टीम मौके पर भेजी है जो संभावित खतरे का पता लगाएगी। उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया है इसको लेकर उचित कदम उठाए जाएं।
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बंजार के उपमंडलाधिकारी पंकज शर्मा ने बताया कि झील का निरीक्षण करने के लिए टीम भेजी गई है जिससे संभावित खतरे का पता लगाया जा सके और प्रशासन समय रहते उचित कदम उठा सके।