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Kullu News: बर्फ में दबा रास्ता, कंधों पर टिकी मरीजों की सांस
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:22 PM IST
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लाहौल के यांगला की मरीजों को बर्फ के बीच कंधों पर उठाकर ले जाते ग्रामीण।-संवाद
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बर्फबारी से अवरुद्ध सड़कों पर चारपाई के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा मरीज
लाहौल घाटी के यांगला गांव में गिड़ गई थी प्रदीप मालपा की माता की तबीयत
मरीज को कंधों और चारपाई पर उठा पांच किमी दूर पीएचसी गोंदला पहुंचाया
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लगातार बर्फबारी ने लाहौल घाटी में जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। इसका सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। कई गांवों में संपर्क सड़कें बंद होने से मरीजों तक इलाज पहुंचना चुनौती बन गया है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि एंबुलेंस की जगह ग्रामीणों के कंधे मरीजों का सहारा बन रहे हैं।
गोंदला पंचायत के गांव यांगला में शनिवार को एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। इसने सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। गांव निवासी प्रदीप मालपा की माता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थीं। सड़क बंद होने के कारण कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूरी में ग्रामीणों ने उन्हें कंधों और चारपाई पर उठाकर करीब पांच किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोंदला तक पहुंचाया।
पूर्व प्रधान प्रेम लाल ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर थी। स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू रेफर कर दिया लेकिन इससे पहले मरीज को दो दिन तक घर में ही रखना पड़ा, क्योंकि संपर्क सड़क बंद थी और लोक निर्माण विभाग की मशीनरी सड़क पर सौ मीटर भी आगे नहीं बढ़ पाई।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग के एसडीओ और अधिशासी अभियंता से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। आखिरकार जान बचाने के लिए जोखिम भरे बर्फीले रास्ते पर मरीज को उठाकर ले जाना ही एकमात्र विकल्प बचा। इस दौरान करीब दो किलोमीटर का रास्ता बेहद खतरनाक था, जहां फिसलन भरी उतराई-चढ़ाई ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि बर्फबारी के बाद हर साल यही हालात बनते हैं। समय पर संपर्क सड़कों की बहाली न होने से मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बर्फबारी के बाद गांवों की संपर्क सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत खोला जाए ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह कंधों पर जिंदगी ढोने की मजबूरी न झेलनी पड़े।
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लाहौल घाटी के यांगला गांव में गिड़ गई थी प्रदीप मालपा की माता की तबीयत
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संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लगातार बर्फबारी ने लाहौल घाटी में जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। इसका सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। कई गांवों में संपर्क सड़कें बंद होने से मरीजों तक इलाज पहुंचना चुनौती बन गया है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि एंबुलेंस की जगह ग्रामीणों के कंधे मरीजों का सहारा बन रहे हैं।
गोंदला पंचायत के गांव यांगला में शनिवार को एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। इसने सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। गांव निवासी प्रदीप मालपा की माता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थीं। सड़क बंद होने के कारण कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूरी में ग्रामीणों ने उन्हें कंधों और चारपाई पर उठाकर करीब पांच किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोंदला तक पहुंचाया।
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पूर्व प्रधान प्रेम लाल ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर थी। स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू रेफर कर दिया लेकिन इससे पहले मरीज को दो दिन तक घर में ही रखना पड़ा, क्योंकि संपर्क सड़क बंद थी और लोक निर्माण विभाग की मशीनरी सड़क पर सौ मीटर भी आगे नहीं बढ़ पाई।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग के एसडीओ और अधिशासी अभियंता से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। आखिरकार जान बचाने के लिए जोखिम भरे बर्फीले रास्ते पर मरीज को उठाकर ले जाना ही एकमात्र विकल्प बचा। इस दौरान करीब दो किलोमीटर का रास्ता बेहद खतरनाक था, जहां फिसलन भरी उतराई-चढ़ाई ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि बर्फबारी के बाद हर साल यही हालात बनते हैं। समय पर संपर्क सड़कों की बहाली न होने से मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बर्फबारी के बाद गांवों की संपर्क सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत खोला जाए ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह कंधों पर जिंदगी ढोने की मजबूरी न झेलनी पड़े।
