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Kullu News: उम्मीदों का पेड़ सूखा, आशाएं भी मुरझाईं
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 01 Feb 2026 10:49 PM IST
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विदेशी सेब पर आयात शुल्क नहीं घटने से बागवानों को झेलना पड़ेगा नुकसान
कार्टन, पैकिंग, ग्रेडिंग मशीन पर नहीं घटा जीएसटी, धरी की धरी रह गईं उम्मीदें
कुल्लू के बागवान बोले- केंद्रीय बजट में कुछ खास नहीं, निराशा ही लगी हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। केंद्रीय बजट से बागवानों को निराशा हाथ लगी है। बागवानों के लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है। बागवानों को उम्मीद थी कि सरकार विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
आने वाले समय में सूबे के बागवानों को इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। गौर रहे कि न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बाद यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देशों से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है।
बागवानों की मानें तो विदेश से आने वाले सेब के आगे हिमाचल का सेब फीका नजर आता है। ऐसे में आने वाले समय में हिमाचल के बागवानों को इसका नुकसान हो सकता है। साथ ही कार्टन, पैकिंग और ग्रेडिंग मशीन आदि पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। बागवानों को उम्मीद थी कि जीएसटी कम कर सरकार राहत देगी लेकिन बागवानों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। हालांकि सरकार ने अखरोट, बादाम और खुमानी के अधिक पैदावार को बढ़ाने के लिए समर्पित कार्यक्रम चलाएगी। जिले में अखरोट, बादाम और खुमानी की पैदावार कुल पैदावार की करीब 5 फीसदी है।
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5000 करोड़ के बागवानी क्षेत्र के लिए बजट निराशाजनक है। बागवानों के लिए इसमें नया कुछ नहीं है। बागवानी से जुड़े कार्टन आदि पर जीएसटी कम नहीं हुआ है। एफटीए से बागवानों को पहले ही झटका लगा है। - प्रेम शर्मा, अध्यक्ष, फलोत्पादक मंडल कुल्लू
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पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट, बादाम और खुमानी के अधिक पैदावार को बढ़ाने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को शामिल कर मूल्य वर्धन करने के लिए सहायता देना सराहनीय कदम है। - सुनील राणा, महासचिव, सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन
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कार्टन, पैकिंग, ग्रेडिंग मशीन पर नहीं घटा जीएसटी, धरी की धरी रह गईं उम्मीदें
कुल्लू के बागवान बोले- केंद्रीय बजट में कुछ खास नहीं, निराशा ही लगी हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। केंद्रीय बजट से बागवानों को निराशा हाथ लगी है। बागवानों के लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है। बागवानों को उम्मीद थी कि सरकार विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
आने वाले समय में सूबे के बागवानों को इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। गौर रहे कि न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बाद यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देशों से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है।
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बागवानों की मानें तो विदेश से आने वाले सेब के आगे हिमाचल का सेब फीका नजर आता है। ऐसे में आने वाले समय में हिमाचल के बागवानों को इसका नुकसान हो सकता है। साथ ही कार्टन, पैकिंग और ग्रेडिंग मशीन आदि पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। बागवानों को उम्मीद थी कि जीएसटी कम कर सरकार राहत देगी लेकिन बागवानों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। हालांकि सरकार ने अखरोट, बादाम और खुमानी के अधिक पैदावार को बढ़ाने के लिए समर्पित कार्यक्रम चलाएगी। जिले में अखरोट, बादाम और खुमानी की पैदावार कुल पैदावार की करीब 5 फीसदी है।
5000 करोड़ के बागवानी क्षेत्र के लिए बजट निराशाजनक है। बागवानों के लिए इसमें नया कुछ नहीं है। बागवानी से जुड़े कार्टन आदि पर जीएसटी कम नहीं हुआ है। एफटीए से बागवानों को पहले ही झटका लगा है। - प्रेम शर्मा, अध्यक्ष, फलोत्पादक मंडल कुल्लू
पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट, बादाम और खुमानी के अधिक पैदावार को बढ़ाने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को शामिल कर मूल्य वर्धन करने के लिए सहायता देना सराहनीय कदम है। - सुनील राणा, महासचिव, सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन
