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हिमाचल: मनाली कचरा प्रबंधन मामले में हाईकोर्ट सख्त, ईओ और कंपनी प्रतिनिधि को होना होगा पेश

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 17 May 2026 05:00 AM IST
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सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली के रंगरी में ठोस कचरे और लीगेसी वेस्ट (दशकों पुराना कचरा) के वैज्ञानिक तरीके से निपटान न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। 

Himachal: High Court Takes Strict Stance on Manali Waste Management Case; EO and Company Representative Ordere
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली के रंगरी में ठोस कचरे और लीगेसी वेस्ट (दशकों पुराना कचरा) के वैज्ञानिक तरीके से निपटान न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने नगर परिषद मनाली और संबंधित निजी कंपनी सनटैन लाइफ प्राइवेट लिमिटेड के कामकाज को दयनीय स्थिति करार दिया है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर परिषद मनाली के अधिशासी अधिकारी (ईओ) और कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि नगर परिषद मनाली के पास गीले-कचरे के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। इसे करीब 300 किलोमीटर दूर जाटवार (अंबाला) के बायोगैस प्लांट में भेजा जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इतनी दूर गीला कचरा ले जाने से पूरा हाईवे प्रदूषित होगा। नियमों के मुताबिक कचरे को घर या स्रोत पर ही गीले और सूखे में अलग किया जाना अनिवार्य है। प्लांट को मिलने वाले कुल 28.78 टन कचरे में से 24.62 टन (लगभग 85 फीसदी) मिश्रित कचरा होता है। केवल 15 फीसदी कचरा ही अलग किया हुआ मिल रहा है। निरीक्षण में पाया गया कि कचरे से निकलने वाला जहरीला और बदबूदार पानी (लीचेट) बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे ब्यास नदी में बह रहा था।

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इसके अलावा कचरा गो सदन के पास खुले में फेंका हुआ पाया गया। ब्यास नदी में लापरवाही और प्रदूषण फैलाने के एवज में नगर परिषद मनाली पर 15,30,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। ठोस कचरे के अवैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए 2,83,07,591 रुपये का एक और भारी जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने नगर परिषद और कंपनी से पूछा है कि उन्होंने अभी तक यह जुर्माना राशि क्यों जमा नहीं कराई। नगर परिषद मनाली और कंपनी की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के समय मांगा गया, जिसमें वे बताएंगे कि इस कचरे को खत्म करने के लिए उनका क्या प्लान है। हालांकि, कंपनी ने दलील दी कि गीले कचरे के उपचार के लिए दो अतिरिक्त शेड का निर्माण गति पर है। अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।

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