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Mandi News: उधारकर्ताओं को ब्याज सहित राशि चुकाने के निर्देश
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मंडी। सिविल जज कोर्ट नंबर-2 मंडी की अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ओर से दायर दो अलग-अलग वसूली वादों में बैंक के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए संबंधित उधारकर्ताओं को बकाया राशि ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए हैं। दोनों मामलों में अदालत ने पाया कि प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुए और बैंक के साक्ष्य अप्रतिवादित रहे।
पहले मामले में एसबीआई ने मैसर्ज पारस फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स और इसके प्रोपराइटर के खिलाफ 1,69,841 रुपये की वसूली के लिए वाद दायर किया था। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2019 में 1,25,000 रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा ली गई थी, लेकिन भुगतान में चूक के कारण खाता एनपीए हो गया। अदालत ने 11.05 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि अदा करने के आदेश दिए।
दूसरे मामले में एसबीआई ने एम/एस दीपक आयरन एंड स्टील व इसके प्रोपराइटर के खिलाफ 1,96,162 रुपये की वसूली के लिए वाद दायर किया था। इसमें वर्ष 2021 में 1,80,000 रुपये का ऋण लिया गया था, जिसे समय पर नहीं चुकाया गया। अदालत ने 9.90 प्रतिशत ब्याज दर के साथ बकाया राशि की वसूली के आदेश जारी किए।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बैंक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय हैं और प्रतिवादियों द्वारा कोई प्रतिवाद नहीं किया गया, जिससे बैंक का दावा सिद्ध होता है। दोनों मामलों में अदालत ने वाद राशि के साथ-साथ वाद अवधि (पेंडेंट लाइट) और भविष्य के लिए ब्याज तथा वाद व्यय भी प्रतिवादियों से वसूलने के निर्देश दिए हैं।
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पहले मामले में एसबीआई ने मैसर्ज पारस फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स और इसके प्रोपराइटर के खिलाफ 1,69,841 रुपये की वसूली के लिए वाद दायर किया था। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2019 में 1,25,000 रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा ली गई थी, लेकिन भुगतान में चूक के कारण खाता एनपीए हो गया। अदालत ने 11.05 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि अदा करने के आदेश दिए।
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दूसरे मामले में एसबीआई ने एम/एस दीपक आयरन एंड स्टील व इसके प्रोपराइटर के खिलाफ 1,96,162 रुपये की वसूली के लिए वाद दायर किया था। इसमें वर्ष 2021 में 1,80,000 रुपये का ऋण लिया गया था, जिसे समय पर नहीं चुकाया गया। अदालत ने 9.90 प्रतिशत ब्याज दर के साथ बकाया राशि की वसूली के आदेश जारी किए।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बैंक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय हैं और प्रतिवादियों द्वारा कोई प्रतिवाद नहीं किया गया, जिससे बैंक का दावा सिद्ध होता है। दोनों मामलों में अदालत ने वाद राशि के साथ-साथ वाद अवधि (पेंडेंट लाइट) और भविष्य के लिए ब्याज तथा वाद व्यय भी प्रतिवादियों से वसूलने के निर्देश दिए हैं।

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