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Mandi News: सिलाई से बनाई पहचान, दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा
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सिलाई से बनाई पहचान, दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा
पति की मौत के बाद सरकाघाट की अनिला ने नहीं हारी हिम्मत
स्वयं बनीं आत्मनिर्भर, अन्य को भी दे रहीं रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। सरकाघाट उपमंडल के बिड्डी सज्याओपिपलू निवासी अनिला कुमारी ने पति के देहांत के बाद मुश्किलों का सामना करते हुए सिलाई कार्य को आजीविका के रूप में अपनाया है। उन्होंने इस कार्य से स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर अन्य महिलाओं को भी रोजगार की राह दिखाई। उन्होंने अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देकर बीटेक की डिग्री करवाई है। अपनी मेहनत के दम पर आज अनिला लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनका कहना है कि कभी भी विपत्तियों से हारना नहीं चाहिए। परिस्थितियां कैसी भी रही हों, हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक रखते हुए मेहनत से काम करते रहें। ईमानदारी से किए प्रयास से ही सफलता मिलती है। 28 वर्ष पूर्व उनका विवाह सरकाघाट निवासी दत्त राम से हुआ था, जो मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। 18 वर्ष पहले जब बेटा दिलबर सिंह मात्र 10 वर्ष का था, तो उस दौरान पति का निधन हो गया। ऐसे में उन पर घर की जिम्मेदारी आ गई। मायका अमरोह में है, वहीं से उन्होंने आईटीआई से सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण हासिल किया है। पति के निधन के बाद सिलाई-कढ़ाई के काम को शुरू कर सरकाघाट में दुकान शुरू की। क्षेत्र की महिलाओं को उनका काम बहुत पसंद आया। इसी को उन्होंने आजीविका के रूप में अपना लिया। काम अच्छा चलने पर क्षेत्र की करीब 30 महिलाओं को भी सिलाई-कढ़ाई काम सिखाया। आज सभी महिलाएं अपनी अलग से आजीविका कमा रही हैं। वह सिलाई कार्य से साधन संपन्न हैं और अब वह बेटे की शादी करने में सक्षम हैं।
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पति की मौत के बाद सरकाघाट की अनिला ने नहीं हारी हिम्मत
स्वयं बनीं आत्मनिर्भर, अन्य को भी दे रहीं रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। सरकाघाट उपमंडल के बिड्डी सज्याओपिपलू निवासी अनिला कुमारी ने पति के देहांत के बाद मुश्किलों का सामना करते हुए सिलाई कार्य को आजीविका के रूप में अपनाया है। उन्होंने इस कार्य से स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर अन्य महिलाओं को भी रोजगार की राह दिखाई। उन्होंने अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देकर बीटेक की डिग्री करवाई है। अपनी मेहनत के दम पर आज अनिला लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनका कहना है कि कभी भी विपत्तियों से हारना नहीं चाहिए। परिस्थितियां कैसी भी रही हों, हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक रखते हुए मेहनत से काम करते रहें। ईमानदारी से किए प्रयास से ही सफलता मिलती है। 28 वर्ष पूर्व उनका विवाह सरकाघाट निवासी दत्त राम से हुआ था, जो मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। 18 वर्ष पहले जब बेटा दिलबर सिंह मात्र 10 वर्ष का था, तो उस दौरान पति का निधन हो गया। ऐसे में उन पर घर की जिम्मेदारी आ गई। मायका अमरोह में है, वहीं से उन्होंने आईटीआई से सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण हासिल किया है। पति के निधन के बाद सिलाई-कढ़ाई के काम को शुरू कर सरकाघाट में दुकान शुरू की। क्षेत्र की महिलाओं को उनका काम बहुत पसंद आया। इसी को उन्होंने आजीविका के रूप में अपना लिया। काम अच्छा चलने पर क्षेत्र की करीब 30 महिलाओं को भी सिलाई-कढ़ाई काम सिखाया। आज सभी महिलाएं अपनी अलग से आजीविका कमा रही हैं। वह सिलाई कार्य से साधन संपन्न हैं और अब वह बेटे की शादी करने में सक्षम हैं।