{"_id":"69d4ec1c980074e795064d3b","slug":"one-year-imprisonment-to-the-accused-in-the-cheque-bounce-case-mandi-news-c-90-1-ssml1045-192033-2026-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 08 Apr 2026 05:04 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
3.70 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। चेक बाउंस मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने आरोपी जयपाल को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और 3.70 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुआवजा राशि का भुगतान न करने की स्थिति में आरोपी को तीन माह की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी।
मामले के तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2018 में वाहन खरीदने के लिए 3.80 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण अदायगी के लिए आरोपी ने 1,89,085 रुपये का चेक जारी किया जो बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी ने विधिक नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि चेक आरोपी की ओर से जारी किया गया था और उसके खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वह अनादरित हुआ। साथ ही नोटिस प्राप्त होने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया और अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर सका।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सभी आवश्यक तत्व इस मामले में सिद्ध होते हैं। इसी आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त अदालत ने पीड़ित पक्ष को कुल 3,70,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसमें मूल चेक राशि और ब्याज शामिल है। सजा के खिलाफ अपील दायर करने के लिए आरोपी के आवेदन पर अदालत ने 30 दिन की जमानत मंजूर की।
Trending Videos
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। चेक बाउंस मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने आरोपी जयपाल को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और 3.70 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुआवजा राशि का भुगतान न करने की स्थिति में आरोपी को तीन माह की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी।
मामले के तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2018 में वाहन खरीदने के लिए 3.80 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण अदायगी के लिए आरोपी ने 1,89,085 रुपये का चेक जारी किया जो बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी ने विधिक नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि चेक आरोपी की ओर से जारी किया गया था और उसके खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वह अनादरित हुआ। साथ ही नोटिस प्राप्त होने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया और अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर सका।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सभी आवश्यक तत्व इस मामले में सिद्ध होते हैं। इसी आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त अदालत ने पीड़ित पक्ष को कुल 3,70,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसमें मूल चेक राशि और ब्याज शामिल है। सजा के खिलाफ अपील दायर करने के लिए आरोपी के आवेदन पर अदालत ने 30 दिन की जमानत मंजूर की।