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Mandi News: चेक बाउंस मामले में सजा पर रोक, अपील लंबित रहने तक राहत
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 04 Apr 2026 11:54 AM IST
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अपील खारिज होने पर ट्रायल कोर्ट के समक्ष करना होगा आत्मसमर्पण
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। चेक बाउंस से जुड़े मामले में दोषी करार व्यक्ति को सत्र न्यायालय से राहत मिली है। सेशन जज मंडी की अदालत ने सजा पर रोक लगाते हुए अपील लंबित रहने तक उसे राहत प्रदान की है।
मामले के तथ्यों के अनुसार, आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने 2 जनवरी 2026 को एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन माह के साधारण कारावास और 4.20 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। मुआवजा अदा न करने की स्थिति में 15 दिन अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया था।
इस आदेश के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर करते हुए सजा स्थगित करने का अनुरोध किया। न्यायालय ने मामले में तथ्य और कानून से जुड़े विचारणीय प्रश्न पाए जाने के आधार पर अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
सत्र न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को सजा पर रोक का लाभ तभी मिलेगा, जब वह निर्धारित मुआवजा राशि का 20 प्रतिशत जमा करेगा। साथ ही, एक लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि अपील के अंतिम निपटारे तक सजा स्थगित रहेगी। यदि अपील खारिज होती है तो आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतनी होगी।
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मंडी। चेक बाउंस से जुड़े मामले में दोषी करार व्यक्ति को सत्र न्यायालय से राहत मिली है। सेशन जज मंडी की अदालत ने सजा पर रोक लगाते हुए अपील लंबित रहने तक उसे राहत प्रदान की है।
मामले के तथ्यों के अनुसार, आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने 2 जनवरी 2026 को एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन माह के साधारण कारावास और 4.20 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। मुआवजा अदा न करने की स्थिति में 15 दिन अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया था।
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इस आदेश के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर करते हुए सजा स्थगित करने का अनुरोध किया। न्यायालय ने मामले में तथ्य और कानून से जुड़े विचारणीय प्रश्न पाए जाने के आधार पर अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
सत्र न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को सजा पर रोक का लाभ तभी मिलेगा, जब वह निर्धारित मुआवजा राशि का 20 प्रतिशत जमा करेगा। साथ ही, एक लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि अपील के अंतिम निपटारे तक सजा स्थगित रहेगी। यदि अपील खारिज होती है तो आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतनी होगी।

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