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Mandi News: श्रमिक कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
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मजदूरों के बजट में कटौती
कल्याण कम, अधिकारियों की मौज ज्यादा, 160 करोड़ बजट में मात्र 35 करोड़ हुए खर्च : भूपेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली फिर विवादों के घेरे में है। बोर्ड की 54वीं बैठक हाल ही में चेयरमैन नरदेव सिंह कंवर की अध्यक्षता में शिमला में संपन्न हुई, उसमें पारित बजट और लंबित दावों को लेकर सीटू से जुड़े बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड मजदूरों के कल्याण के बजाय अधिकारियों के वेतन-भत्तों, नई गाड़ियों और पब्लिसिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
भूपेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए मजदूरों की सहायता को 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन वित्त वर्ष के अंत तक मात्र 35 करोड़ ही जारी किए। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि पिछले चार वर्षों के एक लाख से ज्यादा आवेदन लंबित पड़े हैं, जिनके क्लेम की राशि 300 करोड़ रुपये से अधिक है।
कहा कि छात्रवृत्ति के 85 करोड़ के बजट में से केवल 17 करोड़ खर्च हुए। मातृत्व सहायता में 5.5 करोड़ के बजट में से मात्र 17.52 लाख जारी किए गए। ओल्ड पेंशन के लिए 1.5 करोड़ में से मात्र 38 लाख और बीमारी के इलाज के लिए 1.5 करोड़ में से केवल 13 लाख रुपये खर्च हुए। स्पष्ट किया कि यदि अगले तीन महीनों में सभी लंबित वित्तीय सहायता जारी नहीं की गई तो सीटू से जुड़ी निर्माण मजदूर यूनियन के बैनर तले हमीरपुर स्थित बोर्ड कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
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कल्याण कम, अधिकारियों की मौज ज्यादा, 160 करोड़ बजट में मात्र 35 करोड़ हुए खर्च : भूपेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली फिर विवादों के घेरे में है। बोर्ड की 54वीं बैठक हाल ही में चेयरमैन नरदेव सिंह कंवर की अध्यक्षता में शिमला में संपन्न हुई, उसमें पारित बजट और लंबित दावों को लेकर सीटू से जुड़े बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड मजदूरों के कल्याण के बजाय अधिकारियों के वेतन-भत्तों, नई गाड़ियों और पब्लिसिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
भूपेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए मजदूरों की सहायता को 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन वित्त वर्ष के अंत तक मात्र 35 करोड़ ही जारी किए। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि पिछले चार वर्षों के एक लाख से ज्यादा आवेदन लंबित पड़े हैं, जिनके क्लेम की राशि 300 करोड़ रुपये से अधिक है।
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कहा कि छात्रवृत्ति के 85 करोड़ के बजट में से केवल 17 करोड़ खर्च हुए। मातृत्व सहायता में 5.5 करोड़ के बजट में से मात्र 17.52 लाख जारी किए गए। ओल्ड पेंशन के लिए 1.5 करोड़ में से मात्र 38 लाख और बीमारी के इलाज के लिए 1.5 करोड़ में से केवल 13 लाख रुपये खर्च हुए। स्पष्ट किया कि यदि अगले तीन महीनों में सभी लंबित वित्तीय सहायता जारी नहीं की गई तो सीटू से जुड़ी निर्माण मजदूर यूनियन के बैनर तले हमीरपुर स्थित बोर्ड कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
