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Mandi News: सीनियर सेकेंडरी स्कूल पलाहोटा में 9 महीने से जमा एक-दो की कक्षाएं बंद
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सीनियर सेकेंडरी का दर्जा केवल कागजों तक सीमित, न छात्र न प्रवक्ता, महज प्रधानाचार्य तैनात
अकेले प्रधानाचार्य के सहारे पलोहटा सीनियर सेकेंडरी स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी
डैहर (मंडी)। उपमंडल सुंदरनगर के पलाहोटा स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शिक्षा विभाग की कथित अनदेखी के चलते यहां जमा एक और जमा दो की कक्षाएं पिछले करीब नौ महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी हैं। नए शैक्षणिक सत्र में भी इन कक्षाओं में विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं हो सका है।
हैरानी की बात यह है कि सीनियर सेकेंडरी स्तर पर एक मात्र प्रधानाचार्य तैनात हैं, जबकि न तो कोई विद्यार्थी मौजूद है और न ही कोई लेक्चरर कार्यरत है। इस तरह स्कूल का सीनियर सेकेंडरी का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
प्रदेश सरकार द्वारा कम संख्या वाले स्कूलों को डिनोटिफाई करने की प्रक्रिया के तहत कई स्कूलों को बंद किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पलाहोटा स्कूल में बिना विद्यार्थियों के ही सीनियर सेकेंडरी स्तर यथावत बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते शिक्षकों की तैनाती की जाती तो विद्यार्थी स्कूल छोड़ने को मजबूर नहीं होते।
स्थानीय लोगों ने इस मामले को एससीएसटी निगम के चेयरमैन लाल सिंह कौशल और क्षेत्रीय विधायक के समक्ष भी उठाया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल केवल नाम मात्र का रह गया है।
पूरा मामला
पलाहोटा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वर्तमान में केवल कक्षा दसवीं तक की पढ़ाई हो रही है, जिसमें 31 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं, जमा एक और जमा दो कक्षाओं में एक भी छात्र नहीं बचा है। पिछले शैक्षणिक सत्र में इन कक्षाओं में लगभग 14 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, लेकिन सत्र शुरू होते ही तीन लेक्चररों के तबादले हो गए।
शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई बाधित रही और विद्यार्थी धीरे-धीरे स्कूल छोड़ते गए। जुलाई की छुट्टियों के बाद कोई भी छात्र नहीं लौटा। इसके बाद अगस्त और सितंबर तक अन्य सभी लेक्चरर भी स्थानांतरित कर दिए गए। वर्तमान में सीनियर सेकेंडरी स्तर पर केवल प्रधानाचार्य ही तैनात हैं।
डिनोटिफिकेशन नियमों पर सवाल
सरकारी नियमों के अनुसार यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या में विद्यार्थी नहीं होते, तो उसे डिनोटिफाई किया जाना चाहिए लेकिन पलाहोटा स्कूल के मामले में करीब नौ महीने बीत जाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है।
इस संबंध में स्कूल की प्रधानाचार्य किरन चौधरी ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्तर पर लंबे समय से कोई छात्र और प्रवक्ता नहीं है तथा उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी भेजी जा चुकी है।
वहीं उपनिदेशक उच्च शिक्षा मंडी यशवंत धीमान ने कहा कि इस संबंध में निदेशक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी गई है और अंतिम निर्णय सरकार स्तर पर लिया जाना है, लेकिन अभी तक कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।
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अकेले प्रधानाचार्य के सहारे पलोहटा सीनियर सेकेंडरी स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी
डैहर (मंडी)। उपमंडल सुंदरनगर के पलाहोटा स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शिक्षा विभाग की कथित अनदेखी के चलते यहां जमा एक और जमा दो की कक्षाएं पिछले करीब नौ महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी हैं। नए शैक्षणिक सत्र में भी इन कक्षाओं में विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं हो सका है।
हैरानी की बात यह है कि सीनियर सेकेंडरी स्तर पर एक मात्र प्रधानाचार्य तैनात हैं, जबकि न तो कोई विद्यार्थी मौजूद है और न ही कोई लेक्चरर कार्यरत है। इस तरह स्कूल का सीनियर सेकेंडरी का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
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प्रदेश सरकार द्वारा कम संख्या वाले स्कूलों को डिनोटिफाई करने की प्रक्रिया के तहत कई स्कूलों को बंद किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पलाहोटा स्कूल में बिना विद्यार्थियों के ही सीनियर सेकेंडरी स्तर यथावत बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते शिक्षकों की तैनाती की जाती तो विद्यार्थी स्कूल छोड़ने को मजबूर नहीं होते।
स्थानीय लोगों ने इस मामले को एससीएसटी निगम के चेयरमैन लाल सिंह कौशल और क्षेत्रीय विधायक के समक्ष भी उठाया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल केवल नाम मात्र का रह गया है।
पूरा मामला
पलाहोटा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वर्तमान में केवल कक्षा दसवीं तक की पढ़ाई हो रही है, जिसमें 31 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं, जमा एक और जमा दो कक्षाओं में एक भी छात्र नहीं बचा है। पिछले शैक्षणिक सत्र में इन कक्षाओं में लगभग 14 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, लेकिन सत्र शुरू होते ही तीन लेक्चररों के तबादले हो गए।
शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई बाधित रही और विद्यार्थी धीरे-धीरे स्कूल छोड़ते गए। जुलाई की छुट्टियों के बाद कोई भी छात्र नहीं लौटा। इसके बाद अगस्त और सितंबर तक अन्य सभी लेक्चरर भी स्थानांतरित कर दिए गए। वर्तमान में सीनियर सेकेंडरी स्तर पर केवल प्रधानाचार्य ही तैनात हैं।
डिनोटिफिकेशन नियमों पर सवाल
सरकारी नियमों के अनुसार यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या में विद्यार्थी नहीं होते, तो उसे डिनोटिफाई किया जाना चाहिए लेकिन पलाहोटा स्कूल के मामले में करीब नौ महीने बीत जाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है।
इस संबंध में स्कूल की प्रधानाचार्य किरन चौधरी ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्तर पर लंबे समय से कोई छात्र और प्रवक्ता नहीं है तथा उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी भेजी जा चुकी है।
वहीं उपनिदेशक उच्च शिक्षा मंडी यशवंत धीमान ने कहा कि इस संबंध में निदेशक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी गई है और अंतिम निर्णय सरकार स्तर पर लिया जाना है, लेकिन अभी तक कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।

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