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Mandi News: सांसद और विधायक की ओर से दी गई दो एंबुलेंस चार साल से ठप

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 12:54 AM IST
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Two ambulances donated by the MP and MLA have been lying idle for four years.
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जोगिंद्रनगर अस्पताल में चालकों के सभी पद खाली होने से दोनों एबुलेंस कि थमे पहिये
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उच्चाधिकारियों से अस्थायी तौर पर चालकों की नियुक्ति की उठाई है मांग : एसएमओ
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में अव्यवस्था का दंश झेल रहे गंभीर मरीज अब अस्पताल में सांसद की ओर से भेंट की गई एंबुलेंस सुविधा से महरूम हो रहे हैं। सौ बिस्तर वाले नागरिक अस्पताल में चालकों के स्वीकृत तीन पद खाली होने से अस्पताल की एंबुलेंस सेवाओं को विराम लगा है। अस्पताल में यह एंबुलेंस सुविधा दिवंगत सांसद राम स्वरूप शर्मा ने उपलब्ध करवाई थी।
इसके संचालन के लिए आउटसोर्स पर एक चालक नियुक्त किया था, इस बीच प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थायी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त होने का फरमान जारी होते ही स्थानीय अस्पताल के चालक को भी भारमुक्त करना पड़ा। अब लाखों रुपये की एंबुलेंस को अस्पताल के एक कोने में खड़ा कर दिया गया है। अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई दो निःशुल्क 108 एंबुलेंस जब शहर से बाहर मरीजों को अस्पताल में आवागमन के लिए व्यस्त होती हैं तो अस्पताल की इसी एंबुलेंस को गंभीर मरीजों के इस्तेमाल में लाया जाता है।
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आपात समय में चिकित्सकों को भी स्वास्थ्य शिविरों में सेवाएं देने के लिए अस्पताल की एंबुलेंस लाभदायक साबित होती है। सबसे बड़ी बात कि कोरोना काल में अस्पताल की अपनी एंबुलेंस संक्रमित मरीजों के लिए संजीवनी साबित हुई। उस दौरान 108 एंबुलेंस की अधिक व्यस्तता गंभीर मरीजों के लिए जोखिम पैदा कर रही थी। वहीं, अपनी मांगों के लिए जब 108 एंबुलेंस के चालक व फार्मासिस्ट हड़ताल पर रहे तो अस्पताल की एंबुलेंस ने गंभीर मरीजों को टांडा व मंडी के अस्पतालों में उपचार दिलाकर जीवनदान दिलाया था और अब अस्पताल की इसी एंबुलेंस को चालकों की कमी के चलते इस्तेमाल में न लाने से गंभीर मरीजों का मर्ज बढ़ गया है।
अस्पताल के एसएमओ डॉ. विकास नाथ ने बताया कि चालकों के सभी पद खाली होने से अस्पताल की एंबुलेंस को इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा है। बताया कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से अस्थायी तौर पर चालकों की नियुक्ति की मांग की गई है ताकि गंभीर मरीजों के लिए एंबुलेंस सेवाओं को फिर से बहाल किया जा सके।
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