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Mandi News: उल्टी और दस्त के मामलों में तेजी, अस्पतालों में बढ़ी भीड़
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क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में उपचार के लिए पहुंचे मरीज व तीमारदार। संवाद
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मौसम में बदलाव के बाद खान-पान में लापरवाही बनी वजह
गंभीर मरीजों को भर्ती कर दिया जा रहा
उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मौसम में अचानक बदलाव के बाद जिला मंडी में उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी सहित जिले के विभिन्न अस्पतालों में रोजाना ऐसे मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। चिकित्सक सामान्य मरीजों को दवाइयों के साथ आवश्यक परामर्श देकर घर भेज रहे हैं, जबकि गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में रोजाना लगभग 15 मरीज उल्टी-दस्त से पीड़ित पाए जा रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इन मामलों का मुख्य कारण खान-पान में लापरवाही और शरीर में पानी की कमी है। मरीज किसी एक क्षेत्र से नहीं, बल्कि जिले के अलग-अलग हिस्सों से उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं, कई लोग इसे गंभीरता से न लेकर घर पर ही उपचार कर रहे हैं। अन्य अस्पतालों की बात करें तो नागरिक अस्पताल सुंदरनगर में रोजाना 5 से 10 मामले सामने आ रहे हैं। नागरिक अस्पताल सरकाघाट में 2 से 3 तथा कोटली में 4 से 5 मरीज प्रतिदिन उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चार दिन पहले कोटली क्षेत्र में पीलिया फैलने की एक फर्जी पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसके बाद जल शक्ति और स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन कदम उठाते हुए चार प्राकृतिक जल स्रोतों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। कोटली क्षेत्र में अधिकतर लोग प्राकृतिक बावड़ियों का पानी पीते हैं, जिसे देखते हुए विभाग सतर्कता बरत रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि मामले किसी एक गांव या स्थान विशेष तक सीमित नहीं हैं, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। मरीजों को आवश्यक दवाइयों के साथ उचित सलाह दी जा रही है।
बॉक्स
गर्मी का मौसम शुरू होते ही अक्सर लोग खान-पान में लापरवाही बरतने लगते हैं, जिससे बीमारियां बढ़ जाती हैं। मंडी जिले में खान-पान और कम पानी सेवन के कारण कुछ मामले सामने आए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में अधिक पानी पिएं, ताजा भोजन करें और खराब खाद्य व पेय पदार्थों के सेवन से बचें। लंबे समय तक रखे दूध, मांस आदि जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए उनका सेवन न करें। बीमारियों से बचाव के लिए अधिक पानी, ताजे फल, नींबू पानी और जलजीरा का काले नमक के साथ सेवन करें। पीलिया और डायरिया होने पर उबला हुआ पानी और ओआरएस घोल का उपयोग करें तथा अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें। -डॉ. दिनेश ठाकुर, सीएमओ एवं एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल मंडी
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गंभीर मरीजों को भर्ती कर दिया जा रहा
उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मौसम में अचानक बदलाव के बाद जिला मंडी में उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी सहित जिले के विभिन्न अस्पतालों में रोजाना ऐसे मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। चिकित्सक सामान्य मरीजों को दवाइयों के साथ आवश्यक परामर्श देकर घर भेज रहे हैं, जबकि गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में रोजाना लगभग 15 मरीज उल्टी-दस्त से पीड़ित पाए जा रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इन मामलों का मुख्य कारण खान-पान में लापरवाही और शरीर में पानी की कमी है। मरीज किसी एक क्षेत्र से नहीं, बल्कि जिले के अलग-अलग हिस्सों से उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं, कई लोग इसे गंभीरता से न लेकर घर पर ही उपचार कर रहे हैं। अन्य अस्पतालों की बात करें तो नागरिक अस्पताल सुंदरनगर में रोजाना 5 से 10 मामले सामने आ रहे हैं। नागरिक अस्पताल सरकाघाट में 2 से 3 तथा कोटली में 4 से 5 मरीज प्रतिदिन उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चार दिन पहले कोटली क्षेत्र में पीलिया फैलने की एक फर्जी पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसके बाद जल शक्ति और स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन कदम उठाते हुए चार प्राकृतिक जल स्रोतों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। कोटली क्षेत्र में अधिकतर लोग प्राकृतिक बावड़ियों का पानी पीते हैं, जिसे देखते हुए विभाग सतर्कता बरत रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि मामले किसी एक गांव या स्थान विशेष तक सीमित नहीं हैं, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। मरीजों को आवश्यक दवाइयों के साथ उचित सलाह दी जा रही है।
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही अक्सर लोग खान-पान में लापरवाही बरतने लगते हैं, जिससे बीमारियां बढ़ जाती हैं। मंडी जिले में खान-पान और कम पानी सेवन के कारण कुछ मामले सामने आए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में अधिक पानी पिएं, ताजा भोजन करें और खराब खाद्य व पेय पदार्थों के सेवन से बचें। लंबे समय तक रखे दूध, मांस आदि जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए उनका सेवन न करें। बीमारियों से बचाव के लिए अधिक पानी, ताजे फल, नींबू पानी और जलजीरा का काले नमक के साथ सेवन करें। पीलिया और डायरिया होने पर उबला हुआ पानी और ओआरएस घोल का उपयोग करें तथा अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें। -डॉ. दिनेश ठाकुर, सीएमओ एवं एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल मंडी
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