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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस मामले में सेब कारोबारी को एक साल कैद
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20 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश
रामपुर के अदालत ने सुनाया फैसला
खरीदे सेब के भुगतान के लिए दिए चेक हुए थे बाउंस
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने 11 साल पुराने चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। दोषी ने एक फर्म से सेब खरीदे थे। राशि का भुगतान करने के लिए 10 लाख रुपये के तीन चेक दिए, जो बाउंस हो गए।
शिकायतकर्ता कमीशन एजेंट है। 2014 में शिकायतकर्ता ने नारकंडा के पास कमीशन एजेंट का व्यवसाय किया। आरोपी नवीन शर्मा ने वहां से खुली बोली में सेब के बक्सों की खरीद की। बक्सों की बिक्री मूल्य के बदले में आरोपी ने 10 लाख रुपये के तीन चेक जारी किए, लेकिन वो बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता ने आरोपी से उक्त राशि की मांग की, लेकिन आरोपी भुगतान करने में विफल रहा। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने काूननी नोटिस भेजा। आरोपी ने फिर भी कोई भुगतान नहीं किया। नतीजतन, यह शिकायत दायर की गई है। ट्रायल के दौरान 2016 में शिकायतकर्ता की मौत हो गई। इसके बाद उनके कानूनी वारिसों को शिकायत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्थापित किया गया।
अदालत ने फैसला दिया है कि आरोपी शिकायतकर्ता को चेक की राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। आरोपी यह साबित करने में विफल रहा है कि शिकायतकर्ता के प्रति उसकी कोई कानूनी देनदारी नहीं है। एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
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रामपुर के अदालत ने सुनाया फैसला
खरीदे सेब के भुगतान के लिए दिए चेक हुए थे बाउंस
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने 11 साल पुराने चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। दोषी ने एक फर्म से सेब खरीदे थे। राशि का भुगतान करने के लिए 10 लाख रुपये के तीन चेक दिए, जो बाउंस हो गए।
शिकायतकर्ता कमीशन एजेंट है। 2014 में शिकायतकर्ता ने नारकंडा के पास कमीशन एजेंट का व्यवसाय किया। आरोपी नवीन शर्मा ने वहां से खुली बोली में सेब के बक्सों की खरीद की। बक्सों की बिक्री मूल्य के बदले में आरोपी ने 10 लाख रुपये के तीन चेक जारी किए, लेकिन वो बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता ने आरोपी से उक्त राशि की मांग की, लेकिन आरोपी भुगतान करने में विफल रहा। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने काूननी नोटिस भेजा। आरोपी ने फिर भी कोई भुगतान नहीं किया। नतीजतन, यह शिकायत दायर की गई है। ट्रायल के दौरान 2016 में शिकायतकर्ता की मौत हो गई। इसके बाद उनके कानूनी वारिसों को शिकायत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्थापित किया गया।
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अदालत ने फैसला दिया है कि आरोपी शिकायतकर्ता को चेक की राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। आरोपी यह साबित करने में विफल रहा है कि शिकायतकर्ता के प्रति उसकी कोई कानूनी देनदारी नहीं है। एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
