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Rampur Bushahar News: पांच साल से क्षेत्रीय प्रबंधक नहीं, रिमोर्ट ने चल रहा नेरवा डिपो
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तारादेवी से स्वीकृत की जा रही चालकों की छुट्टियां
आरएम को जिम्मा संभालने वाले ट्रैफिक मैनेजर को भी भेजा जा रहा डेपुटेशन पर
मेकेनिक और कंडक्टरों की कमी से यात्री परेशान
स्पेयर पार्ट्स और स्टाफ की कमी से पटरी से उतरी व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू )। हिमाचल पथ परिवहन निगम के नेरवा डिपो की हालत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। डिपो को तारादेवी से चलाया जा रहा है। बीते पांच साल से क्षेत्रीय प्रबंधक का पद रिक्त है। क्षेत्रीय प्रबंधक का प्रभार ट्रैफिक मैनेजर अनिल शर्मा के पास है। उन्हें भी बीच-बीच में दूसरे डिपुओं में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है।
बीते साल 16 सितंबर को उन्हें प्रतिनियुक्ति पर मंडी के धर्मपुर डिपो जाने के आदेश थमाए थे। वहां वे 26 दिसंबर तक रहे। 28 दिसंबर को वे नेरवा डिपो लौटे। 22 जनवरी को उन्हें फिर से प्रतिनियुक्ति पर रिकांगपिओ जाने के आदेश जारी कर दिए गए। इस समय उनके पास रिकांगपिओ और नेरवा दोनों डिपुओं का जिम्मा है। उनके जाने के बाद नेरवा डिपो का सर्वेसर्वा बस अड्डा प्रभारी को बना दिया जाता है। नेरवा डिपो में बीते दो साल से 10 बसों की कमी चल रही है। इसके चलते डिपो के 16 रूट बंद हैं।कई रूटों को क्लब कर चला जा रहा है। इसके कारण दो-दो बसों की सवारियों को ही एक बस से सफर करना पड़ता है। सवारियां अधिक होने के कारण अक्सर ओवरलोड बसें ब्रेकडाउन हो जाती हैं।
डिपो में स्पेयर पार्ट्स की लंबे अर्से से कमी तो चल ही रही है। मेकेनिकों के 35 स्वीकृत पदों के स्थान पर 16 ही कार्यरत हैं। बीते 22 दिसंबर को उत्तराखंड के मिनस और क्वाणु के बीच इंजन में खराबी आने के कारण निगम की बस खराब हो गई थी। इसके चलते बस एक हफ्ते तक वहां खड़ी रही। अमर उजाला में 28 दिसंबर को इसको लेकर खबर प्रकाशित हुई। उसके बाद शिमला से मेकेनिक भेज कर इसे ठीक करवाया गया। कंडक्टरों के 65 स्वीकृत पदों के स्थान पर मात्र 47 कंडक्टर ही कार्यरत हैं। इसी तरह 42 बसों में मात्र 42 ही चालक कार्यरत हैं। यदि किसी चालक को छुट्टी पर जाना हो तो उसकी छुट्टी नेरवा के स्थान पर तारादेवी से स्वीकृत होती है। मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त बस सुबह पौने पांच बजे चौपाल से चली। इसके बाद साढ़े सात बजे नेरवा से पांवटा साहिब के लिए रवाना हुई। चालक-परिचालक का देहरादून के सिलाकुई के ग्राफिक एरा अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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नेरवा (रोहड़ू )। हिमाचल पथ परिवहन निगम के नेरवा डिपो की हालत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। डिपो को तारादेवी से चलाया जा रहा है। बीते पांच साल से क्षेत्रीय प्रबंधक का पद रिक्त है। क्षेत्रीय प्रबंधक का प्रभार ट्रैफिक मैनेजर अनिल शर्मा के पास है। उन्हें भी बीच-बीच में दूसरे डिपुओं में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है।
बीते साल 16 सितंबर को उन्हें प्रतिनियुक्ति पर मंडी के धर्मपुर डिपो जाने के आदेश थमाए थे। वहां वे 26 दिसंबर तक रहे। 28 दिसंबर को वे नेरवा डिपो लौटे। 22 जनवरी को उन्हें फिर से प्रतिनियुक्ति पर रिकांगपिओ जाने के आदेश जारी कर दिए गए। इस समय उनके पास रिकांगपिओ और नेरवा दोनों डिपुओं का जिम्मा है। उनके जाने के बाद नेरवा डिपो का सर्वेसर्वा बस अड्डा प्रभारी को बना दिया जाता है। नेरवा डिपो में बीते दो साल से 10 बसों की कमी चल रही है। इसके चलते डिपो के 16 रूट बंद हैं।कई रूटों को क्लब कर चला जा रहा है। इसके कारण दो-दो बसों की सवारियों को ही एक बस से सफर करना पड़ता है। सवारियां अधिक होने के कारण अक्सर ओवरलोड बसें ब्रेकडाउन हो जाती हैं।
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डिपो में स्पेयर पार्ट्स की लंबे अर्से से कमी तो चल ही रही है। मेकेनिकों के 35 स्वीकृत पदों के स्थान पर 16 ही कार्यरत हैं। बीते 22 दिसंबर को उत्तराखंड के मिनस और क्वाणु के बीच इंजन में खराबी आने के कारण निगम की बस खराब हो गई थी। इसके चलते बस एक हफ्ते तक वहां खड़ी रही। अमर उजाला में 28 दिसंबर को इसको लेकर खबर प्रकाशित हुई। उसके बाद शिमला से मेकेनिक भेज कर इसे ठीक करवाया गया। कंडक्टरों के 65 स्वीकृत पदों के स्थान पर मात्र 47 कंडक्टर ही कार्यरत हैं। इसी तरह 42 बसों में मात्र 42 ही चालक कार्यरत हैं। यदि किसी चालक को छुट्टी पर जाना हो तो उसकी छुट्टी नेरवा के स्थान पर तारादेवी से स्वीकृत होती है। मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त बस सुबह पौने पांच बजे चौपाल से चली। इसके बाद साढ़े सात बजे नेरवा से पांवटा साहिब के लिए रवाना हुई। चालक-परिचालक का देहरादून के सिलाकुई के ग्राफिक एरा अस्पताल में उपचार चल रहा है।
