फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Apple supplies in fruit markets, including those in Himachal, are not meeting expectations

Rampur Bushahar News: सेब पर दाग, गिरे भाव

Wed, 19 Aug 2026 11:54 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:54 PM IST
विज्ञापन
ओलों से दागदार सेब के नहीं मिल रहे भाव, बागवानों को उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल
विज्ञापन

मंडियों में घटा सेब, दागदार और छोटे फल के नहीं मिल रहे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
हिमाचल समेत अन्य सभी फल मंडियों में सेब की आपूर्ति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो रही है। बागवानों को ओलावृष्टि के दौरान ओलों से दागदार हुए सेब का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सेब पर दाग होने से मंडियों में इसके भाव गिर गए हैं। साथ ही, सेब छोटे आकार के रह गए हैं। मंडियों में ऐसे सेब को करीब 600 से 1,200 रुपये प्रति पेटी के दाम मिल रहे हैं। इन दामों में बागवानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बागवानों का कहना है कि इस वर्ष मौसम की मार से पहले ही सेब की गुणवत्ता और आकार प्रभावित हुआ है। कई बगीचों में ओलावृष्टि के कारण सेब के फलों पर ओलों के दाग पड़ गए हैं। हालांकि, ऐसे सेब खाने योग्य होते हैं, लेकिन मंडियों में खरीदार इन्हें कम कीमत पर लेने में ही रुचि दिखा रहे हैं। छोटे आकार के सेब को लेकर स्थिति और गंभीर है। कई खरीदार छोटे फल की पेटियां लेने से भी बच रहे हैं। इससे बागवानों के सामने उपज को मंडी तक पहुंचाने के बाद भी उचित मूल्य मिलने का संकट खड़ा हो गया है। बागवान प्रमोद ठाकुर ने कहा कि सेब की फसल तैयार करने में खाद, दवाइयों, मजदूरी, सिंचाई, पैकिंग और ढुलाई पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। इसके बावजूद यदि दागदार या छोटे आकार के सेब के लिए 600 से 1,200 रुपये प्रति पेटी ही मिलते हैं, तो लागत निकालना कठिन है। उन्होंने कहा कि बागवानों को गुणवत्ता के आधार पर उचित बाजार व्यवस्था उपलब्ध करवाने की जरूरत है। बागवान हरिंद्र चौहान और राकेश ठाकुर ने भी कहा कि मंडियों में खरीदारों की संख्या और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि केवल चमकदार और बड़े आकार के फलों को प्राथमिकता मिलने से मौसम की मार झेल चुके बागवानों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बागवानों के अनुसार, यदि मंडियों में सेब की ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और वैकल्पिक बाजार की बेहतर व्यवस्था हो तो दागदार और छोटे आकार के फलों को भी उचित मूल्य मिल सकता है। इससे बागवानों को कम से कम उत्पादन लागत निकालने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed