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Rampur Bushahar News: चेतन बरागटा ने शिक्षा सचिव के समक्ष रखा कन्या स्कूलों के विलय का मुद्दा
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भाजपा आईटी एवं सोशल मीडिया के प्रदेश प्रभारी चेतन बरागटा
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कन्या स्कूल के विलय के निर्णय पर पुनर्विचार की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। प्रदेश में कन्या विद्यालयों के विलय को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भाजपा नेता चेतन बरागटा ने हिमाचल प्रदेश शिक्षा सचिव से मुलाकात की और अभिभावकों और छात्राओं की भावनाओं से अवगत करवाया। उन्होंने पत्र सौंपते हुए कोटखाई और जुब्बल क्षेत्र के कन्या स्कूलों के विलय के निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताई और तत्काल पुनर्विचार की मांग की। बरागटा ने कहा कि परीक्षा सत्र के दौरान इस प्रकार का निर्णय विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से कन्या विद्यालयों के संदर्भ में छात्राओं ने सुरक्षा, बढ़ती दूरी, सड़क की स्थिति और मूलभूत सुविधाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शिक्षा सचिव से आग्रह किया कि विलय से जुड़े सभी प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर पुनर्विचार किया जाए और अभिभावकों, स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए, ताकि छात्राओं के हितों और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। बरागटा ने यह भी स्पष्ट किया कि अचानक लिए गए फैसलों से शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों पर भी प्रभाव पड़ा है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले स्पष्ट ट्रांजिशन प्लान तैयार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यापक हित में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। प्रदेश में कन्या विद्यालयों के विलय को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भाजपा नेता चेतन बरागटा ने हिमाचल प्रदेश शिक्षा सचिव से मुलाकात की और अभिभावकों और छात्राओं की भावनाओं से अवगत करवाया। उन्होंने पत्र सौंपते हुए कोटखाई और जुब्बल क्षेत्र के कन्या स्कूलों के विलय के निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताई और तत्काल पुनर्विचार की मांग की। बरागटा ने कहा कि परीक्षा सत्र के दौरान इस प्रकार का निर्णय विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से कन्या विद्यालयों के संदर्भ में छात्राओं ने सुरक्षा, बढ़ती दूरी, सड़क की स्थिति और मूलभूत सुविधाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शिक्षा सचिव से आग्रह किया कि विलय से जुड़े सभी प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर पुनर्विचार किया जाए और अभिभावकों, स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए, ताकि छात्राओं के हितों और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। बरागटा ने यह भी स्पष्ट किया कि अचानक लिए गए फैसलों से शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों पर भी प्रभाव पड़ा है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले स्पष्ट ट्रांजिशन प्लान तैयार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यापक हित में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।