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फाग मेला : पदम महल परिसर में देवलू संग ग्रामीणों ने डाली नाटी
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फाग मेले में पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डालती महिलाएं। संवाद
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देवी-देवताओं ने किया शहर का भ्रमण, दर्शन के लिए लोगों का लगा तांता, सुख-समृद्धि का लिया आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर में जिला स्तरीय फाग मेले के तीसरे दिन पदम महल परिसर में वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक परिधान में देवलुओं के साथ ग्रामीणों ने नाटी डाली। फाग मेले में देवी-देवताओं की शिरकत से माहौल देवमय बना हुआ है। मेले के तीसरे दिन पदम पैलेस में ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवलुओं के साथ हजारों लोग झूमे। दिनभर नाटियों का दौर चला। लोगों ने देवी-देवताओं के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। मेले के तीसरे दिन शहर के विभिन्न स्थानों पर ठहरे देवी-देवता सुबह ठहराव स्थल से भ्रमण के लिए निकले। रामपुर बाजार में भ्रमण के दौरान कारोबारियों ने देवी-देवताओं का स्वागत किया। देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया। देवताओं के साथ नाचते-गाते हुए देवलू और ग्रामीण मुख्य शहर से एनएच-पांच से होते हुए पदम महल परिसर पहुंचे। देवी-देवता पूरे शहर की परिक्रमा कर क्रमवार पदम पैलेस पहुंचे। यहां अपनी चयनित जगह पर सभी देवी-देवता बैठे। इसके बाद नाटियों का दौर शुरू हुआ। बुशहरी नाटी की रौनक रही, वहीं कुल्लवी नाटियों ने भी लोगों का खूब मनोरजंन किया। कुल्लुवी नाटी में पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर भावी पीढ़ी को संस्कृति संजोने का संदेश दिया। मेले में पहुंचे लोगों ने सभी देवी-देवताओं के समक्ष शीश नवाया और माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर में जिला स्तरीय फाग मेले के तीसरे दिन पदम महल परिसर में वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक परिधान में देवलुओं के साथ ग्रामीणों ने नाटी डाली। फाग मेले में देवी-देवताओं की शिरकत से माहौल देवमय बना हुआ है। मेले के तीसरे दिन पदम पैलेस में ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवलुओं के साथ हजारों लोग झूमे। दिनभर नाटियों का दौर चला। लोगों ने देवी-देवताओं के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। मेले के तीसरे दिन शहर के विभिन्न स्थानों पर ठहरे देवी-देवता सुबह ठहराव स्थल से भ्रमण के लिए निकले। रामपुर बाजार में भ्रमण के दौरान कारोबारियों ने देवी-देवताओं का स्वागत किया। देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया। देवताओं के साथ नाचते-गाते हुए देवलू और ग्रामीण मुख्य शहर से एनएच-पांच से होते हुए पदम महल परिसर पहुंचे। देवी-देवता पूरे शहर की परिक्रमा कर क्रमवार पदम पैलेस पहुंचे। यहां अपनी चयनित जगह पर सभी देवी-देवता बैठे। इसके बाद नाटियों का दौर शुरू हुआ। बुशहरी नाटी की रौनक रही, वहीं कुल्लवी नाटियों ने भी लोगों का खूब मनोरजंन किया। कुल्लुवी नाटी में पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर भावी पीढ़ी को संस्कृति संजोने का संदेश दिया। मेले में पहुंचे लोगों ने सभी देवी-देवताओं के समक्ष शीश नवाया और माथा टेककर आशीर्वाद लिया।

फाग मेले में पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डालती महिलाएं। संवाद

फाग मेले में पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डालती महिलाएं। संवाद

फाग मेले में पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डालती महिलाएं। संवाद

फाग मेले में पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डालती महिलाएं। संवाद

फाग मेले में पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डालती महिलाएं। संवाद