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Rampur Bushahar News: नेरवा में सेब को छोड़ जापानी फल की खेती कर रहे बागवान

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:56 PM IST
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Gardeners in Nerwa are cultivating Japanese fruits instead of apples
जापानी फल। 
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. जलवायु परिवर्तन के कारण सेब की फसल में आई कमी
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संवाद न्यूज एजेंसी

नेरवा (रोहड़ू)। नेरवा तहसील के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई बागवान अब सेब की जगह जापानी फल की बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका एक कारण बीते कुछ साल से हो रहा जलवायु परिवर्तन है। इससे सेब की फसल में कमी आई है। बागवानों के एक वर्ग का दूसरे फलों के उत्पादन में रुझान बढ़ा है। अधिकतर बागवान अब सेब के पौधे लगाने के बजाय जापानी फल के पौधे लगा रहे हैं। जापानी फल को पर्सिमोन कहते हैं। भारत के कुछ भागों में इसे तेंदू, अमरफल और रामफल भी कहा जाता है। इसका आकार संतरे जितना होता है। जापानी फल की 400 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें से हचिया और फूयु सबसे मशहूर है। यह अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार गहरे नारंगी, लाल और मिक्स नारंगी रंग में आती है। इसका पेड़ सेब के पेड़ की तरह होता है। पहाड़ी इलाकों में यह दो हजार फीट से सात हजार फीट की ऊंचाई पर उगाया जाता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। यह हृदय के स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है। यह सूजन और वजन को कम करने में मदद करता है।

कीमा-चंद्रावली के प्रगतिशील बागवान सलमान ने बताया कि सेब के पौधों के रख-रखाव का खर्चा अधिक बढ़ जाने और फसलों के बार-बार टूटने के कारण लोग अब सेब के साथ जापानी फल के पौधे लगा रहे हैं। इस साल दिल्ली की मंडी में गुणवत्ता के आधार पर इस फल की 10 किलो की पेटी 900 से 2500 रुपये तक बिकी। इसके रख-रखाव का खर्चा भी सेब के मुकाबले कम है। तीसरे साल सैंपल फ्रूट और चौथे साल यह फसल दे देता है। वह स्वयं भी अभी तक 300 से अधिक जापानी फल के पौधे लगा चुके हैं।
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