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Rampur Bushahar News: वन भूमि पर हुए कब्जों को 31 दिसंबर से पहले वन विभाग के पक्ष में करें अधिकारी

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:05 PM IST
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HoFF Sanjay Sood inspected the Rampur and Kotgarh forest divisions
एचओएफएफ संजय सूद ने किया रामपुर वन मंडल का निरीक्षण। स्रोत : विभाग
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. एचओएफएफ संजय सूद ने किया रामपुर और कोटगढ़ वन मंडल का निरीक्षण

. वानिकी गतिविधियों की समीक्षा कर अधिकारियों को कचनार की नर्सरी लगाने के दिए निर्देश
. बरसात से सडक़ किनारे गिरे पेड़ों को हटाकर निपटान को भी कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर और कोटगढ़ क्षेत्र में 31 दिसंबर से पहले वन भूमि पर हुए अवैध कब्जों को हटाया जाए और वन विभाग के पक्ष में लिया जाए। हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स एवं सह-प्रधान मुख्य अरण्यपाल (एचओएफएफ) संजीव सूद ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि न्यायालय के आदेशानुसार इस कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने रामपुर और कोटगढ़ वन मंडल का निरीक्षण किया। सूद ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ वानिकी गतिविधियों बारे समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्र में कचनार की नर्सरी लगाने और बरसात के दौरान सड़कों के किनारे गिरे पेड़ों को भी हटाने को कहा। हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स एवं सह-प्रधान मुख्य अरण्यपाल संजीव सूद ने कोटगढ़ और रामपुर वन मंडल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग की विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ संवाद किया और आगामी समय में किए जाने वाले कार्यों को लेकर दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन अतिक्रमण के संबंध में माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और न्यायालय के आदेशानुसार 31 दिसंबर 2026 तक चिह्नित अतिक्रमण मामलों में वन भूमि का कब्जा वन विभाग के पक्ष में लेने के निर्देश दिए। दौरे के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय कर्मचारियों को कचनार प्रजाति को नर्सरी कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण देशज प्रजाति के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कचनार अपनी पारिस्थितिक, औषधीय और जैव विविधता संबंधी महत्ता के लिए जाना जाता है। उन्होंने मानसून ऋतु के आगमन से पूर्व सड़क के किनारे गिरे और क्षतिग्रस्त वृक्षों के समयबद्ध निपटान के निर्देश भी दिए, ताकि जन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वन प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने वन संरक्षण, वन भूमि की सुरक्षा और सतत पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की परिकल्पना एवं विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों कर्मचारियों को वानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और इसके सुधार बारे भी अधिकारी, कर्मचारियों से विचार-विमर्श किया।
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