{"_id":"6a3534d6a53d51909009d096","slug":"inauguration-of-the-jatar-fair-in-bhadawali-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1034-162778-2026-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: भड़ावली में 21 जून से सजेगी शाड़ की जातर\nढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमेंगे ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: भड़ावली में 21 जून से सजेगी शाड़ की जातर ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमेंगे ग्रामीण
विज्ञापन
रामपुर उपमंडल की शलाटी घोड़ी के भ्रमण पर देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू और देवलू। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शलाटी घोड़ी के दौरे पर निकले अधिष्ठाता देवता साहिब लक्ष्मी नारायण
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर उपमंडल की भड़ावली पंचायत में 21 जून से ऐतिहासिक एवं प्राचीन शाड़ की जातर (आषाढ़ का मेला) सजेगी। मसारना गांव से मेले का भव्य शुभारंभ होगा। देवलुओं के साथ ग्रामीण ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमेंगे। इसके बाद यह मेला भड़ावली पंचायत में एक सप्ताह तक चलेगा। हर गांव में शाड़ की जातर में ग्रामीण वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाटी का दौर चलाएंगे। आराध्य देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू शलाटी घोड़ी के भ्रमण पर निकल चुके हैं। शुक्रवार को देवता साहिब लाव-लश्कर के साथ करेरी गांव पहुंचे। यहां पहुंचने पर ग्रामीणों ने अपने इष्ट का जोरदार स्वागत किया। रामपुर उपमंडल की शलाटी घोड़ी में धूमधाम से मनाया जाने वाला शाड़ की जातर मेला सदियों पुरानी परंपराओं को संजोए हुए है। ग्रामीण मेले और अपने आराध्य देवता का बेसब्री से इंतजार करते हैं। शलाटी घोड़ी में देवता साहिब लक्ष्मी नारायण कुमसू की अगुवाई में कई गांव में मेला सजता है। दिनभर मेले में वाद्ययंत्रों की थाप पर नाटियों का दौर चलता है। देवता साहिब के भ्रमण का पहला पड़ाव खखरोला गांव है। इसके बाद देवता साहिब लाव-लश्कर के साथ राजपुरा पहुंचे। उसके बाद देवता साहिब गटोल गांव पहुंचे और शुक्रवार को करेरी गांव पहुंचे। शनिवार को रसेंदली गांव में ठहराव होगा। देवता साहिब रविवार को मसारना गांव पहुंचेंगे और शाड़ की जातर का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इसके बाद छलावट, कमलाऊ और भड़ावली में अलग-अलग दिन मेला सजेगा। अगले दिन से जिला स्तरीय नोगली मेला शुरू होगा, जहां पर अन्य देवता साहिब मेले में शिरकत कर शोभा बढ़ाएंगे। तीन दिन तक आयोजित होने वाले मेले में हजारों लोग देवताओं का आशीर्वाद लेंगे। 28 जून को शाड़ की जातर मेले का विधिवत रूप से समापन होगा। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जीवन चौहान ने कहा कि आराध्य देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू शलाटी घोड़ी के दौरे पर निकल चुके हैं। मसारना गांव से ऐतिहासिक शाड़ की जातर शुरू होगी।
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर उपमंडल की भड़ावली पंचायत में 21 जून से ऐतिहासिक एवं प्राचीन शाड़ की जातर (आषाढ़ का मेला) सजेगी। मसारना गांव से मेले का भव्य शुभारंभ होगा। देवलुओं के साथ ग्रामीण ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमेंगे। इसके बाद यह मेला भड़ावली पंचायत में एक सप्ताह तक चलेगा। हर गांव में शाड़ की जातर में ग्रामीण वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाटी का दौर चलाएंगे। आराध्य देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू शलाटी घोड़ी के भ्रमण पर निकल चुके हैं। शुक्रवार को देवता साहिब लाव-लश्कर के साथ करेरी गांव पहुंचे। यहां पहुंचने पर ग्रामीणों ने अपने इष्ट का जोरदार स्वागत किया। रामपुर उपमंडल की शलाटी घोड़ी में धूमधाम से मनाया जाने वाला शाड़ की जातर मेला सदियों पुरानी परंपराओं को संजोए हुए है। ग्रामीण मेले और अपने आराध्य देवता का बेसब्री से इंतजार करते हैं। शलाटी घोड़ी में देवता साहिब लक्ष्मी नारायण कुमसू की अगुवाई में कई गांव में मेला सजता है। दिनभर मेले में वाद्ययंत्रों की थाप पर नाटियों का दौर चलता है। देवता साहिब के भ्रमण का पहला पड़ाव खखरोला गांव है। इसके बाद देवता साहिब लाव-लश्कर के साथ राजपुरा पहुंचे। उसके बाद देवता साहिब गटोल गांव पहुंचे और शुक्रवार को करेरी गांव पहुंचे। शनिवार को रसेंदली गांव में ठहराव होगा। देवता साहिब रविवार को मसारना गांव पहुंचेंगे और शाड़ की जातर का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इसके बाद छलावट, कमलाऊ और भड़ावली में अलग-अलग दिन मेला सजेगा। अगले दिन से जिला स्तरीय नोगली मेला शुरू होगा, जहां पर अन्य देवता साहिब मेले में शिरकत कर शोभा बढ़ाएंगे। तीन दिन तक आयोजित होने वाले मेले में हजारों लोग देवताओं का आशीर्वाद लेंगे। 28 जून को शाड़ की जातर मेले का विधिवत रूप से समापन होगा। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जीवन चौहान ने कहा कि आराध्य देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू शलाटी घोड़ी के दौरे पर निकल चुके हैं। मसारना गांव से ऐतिहासिक शाड़ की जातर शुरू होगी।